
Deoghar: लगातार तीसरे साल भी प्रकृति की मार झेलते संताल परगना (Santhal Pargana) के किसानों के चेहरे पीले पड़ गए हैं। फसल के बीज डालने के समय चिलचिलाती धूप और अब अनावृष्टि के कारण यहां के किसानों के अंदर रही-सही हिम्मत भी जवाब दे गई है।

हल्की-फुल्की वर्षा के बाद कर्ज लेकर लगभग 30 फीसदी किसानों ने खेतों में धान के बिचड़े डाले लेकिन अब बारिश की बेरुखी से इन बिचड़ों पर ग्रहण लगना शुरू हो गया है। किसानों ने कम पानी की स्थिति में होने वाले मकई-अरहर भी खर्च कर बोए लेकिन इसकी भी हालत कमोवेश ऐसी ही है। दो चार दिन और बारिश ना हुई तो मकई और अरहर के फसल भी झुलस जाएंगे, इसमें कोई शक नहीं।

जरमुंडी प्रखंड मण्डलडीह के किसान दुबे टुड्डू, भुटुआ टुड्डू, विजय हांसदा, राजेश हांसदा मौसम के साथ सरकार के रवैये से बेहद खिन्न होकर कहते हैं कि लगातार तीसरे साल भी फसल नहीं होगा तो हम सब की स्थिति बदतर हो जाएगी। इस आदिवासी बाहुल्य गांव के लघु किसान कहते हैं कि प्रधानमंत्री योजना के तहत अभी उन्हें राशन तो मिल जाता है लेकिन जब फसल नहीं होगा तो उनके अन्य जरूरतें कैसे पूरी होंगी?
आदिवासी किसान इस बात से पूरी तरह अनभिज्ञ दिखे कि प्रधानमंत्री सिंचाई जल योजना जैसी कोई योजना भी संचालित हो रही है, जिसके तहत बोरिंग के साथ पाईप लाइन द्वारा खेतों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने जैसी कोई योजना भी है। जाहिर है भूमि संरक्षण विभाग द्वारा ऐसी महत्वपूर्ण योजना को आम जन तक पहुंचाने का कोई उपक्रम करता नहीं दिखता, जिससे लोगों को लाभ मिल सके।


