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2019 में ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है Pakur, लेकिन आज भी लोग खुले में कर रहे हैं शौच

Pakur: खुले में शौच मुक्त किए जाने को लेकर पंचायत स्तर पर अभियान चलाकर शौचालय का निर्माण कराया गया है, ताकि लोग खुले में शौच नहीं करें। शौचलय तो बना दिया गया लेकिन लोगों को जागरूक नहीं किए जाने के चलते आज भी लोग खुले में शौच कर रहे हैं। पाकुड़ प्रखंड के कई ऐसे पंचायत भी है जहां शौचालय निर्माण के लिए राशि निकासी तो कर ली गई है लेकिन शौचालय नहीं बनाया गया है।

जल सहिया और मुखिया की मिली भगत से राशि का दुरूपोयग किए जाने का भी मामला सामने आया है। कई जल सहिया पर शौचालय की राशि हेराफेरी किए जाने को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने सर्टिफिकेट केस भी किया गया है उसके बाद भी शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। कई पंचायत में तो राशि का दुरूपोयग करते हुए खेत-खलिहान में शौचालय का निर्माण करा दिया गया है। इसका उपयोग तक नहीं होता है। पाकुड़ के ग्रामीण क्षेत्र के लोग खुले में शौच जाने से कई घटना का शिकार भी हुए है। वैसे तो पाकुड़ जिला को वर्ष 2019 में ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। बावजूद इसके भी लोग खुले में शौच जाते हैं। आज भी सैकड़ों घरों में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है।

नतीजतन शहरी पाकुड़ प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के तकरीबन 35 फीसदी लोग खुले में शौच जाने को विवश हैं। विभाग द्वारा भले ही लोगों को शौचालय का उपयोग करने की बात कही जाती रही है। लेकिन उस दिशा में पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान नहीं चलाया जा रहा है। शौचालय लोगों को मिला है। शौचालय दिए जाने के दौरान लोगों को उसका उपयोग किए जाने को लेकर पर्याप्त जागरूक नहीं किया गया। लोग आज भी खुले में शौच जाते है। लोगों में आज भी जागरूकता की कमी है और उसके लिए विभाग को गंभीरता से जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।

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