
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में असंवैधानिक घोषित किये जाने के बावजूद इंफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी एक्ट (IT ACT) की धारा 66A के तहत पुलिस थानों में FIR दर्ज होने के खिलाफ PUCL की याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्यों के हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चार हफ्ते बाद सुनवाई का आदेश दिया है।

इस मामले में केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करते हुए कहा कि श्रेया सिंघल के फैसले को लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों और उनकी पुलिस की है। पुलिस राज्य का विषय है इसलिए इसमें केंद्र कुछ नहीं कर सकता है। तब याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए केंद्र सरकार ने उचित कदम नहीं उठाया। तब कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील संजय पारिख से कहा कि आप राज्य सरकारों को भी पक्षकार बनाइए तब हम उचित नोटिस जारी कर सकेंगे।

पिछली 7 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई थी कि आईटी एक्ट की धारा 66ए को रदद् किये जाने के बाद भी इस धारा के तहत गिरफ्तारी हो रही है। कोर्ट ने कहा था कि हम इस मामले पर सख्त कार्रवाई करेंगे। याचिका पीपुल्स युनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि मार्च 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66ए को समाप्त कर दिया। इस आदेश के बाद भी 22 से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दायर किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा था कि अगर याचिकाकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं, वो सही हैं तो आप लोगों को कड़ी से कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने उन लोगों की सूची दी है, जिन पर मुकदमा चलाया गया है। हम उन सभी लोगों को जेल में भेज देंगे, जिन्होंने गिरफ्तारी का आदेश दिया था। हम सख्त कदम उठाने वाले हैं।
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