
New Delhi: भारत परमाणु सक्षम इंटर- कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक अग्नि-5 (Inter-Continental Ballistic Missile Agni-5) मिसाइल का पहला परीक्षण 23 सितम्बर को करने जा रहा है।

चीन-पाकिस्तान समेत यूरोप और अफ्रीकी देशों को अपनी जद में लेने वाली इस मिसाइल की लॉन्चिंग से पहले ही चीन में खौफ पैदा हो गया है।

अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के न्यूक्लियर सबमरीन समझौते से भड़के चीन ने अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव का हवाला देते हुए भारत के मिसाइल कार्यक्रम पर सवाल उठाया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद जारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव का हवाला देते हुए भारत के उस मिसाइल कार्यक्रम पर सवाल उठाया है, जिसमें भारत 23 सितंबर को इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का परीक्षण करने जा रहा है।
चीन के प्रवक्ता ने कहा कि जून 1998 में अपनाए गए यूएनएससी के प्रस्ताव UNSCR-1172 में पहले से ही स्पष्ट शर्तें हैं। उनके अनुसार दक्षिण एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना सभी देशों की जिम्मेदारी है। चीन उम्मीद करता है कि सभी देश इस मामले में लगातार रचनात्मक प्रयास करेंगे।
दरअसल, भारत ने जब 1998 में परमाणु परीक्षण किया था तो उसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव में भारत और पाकिस्तान को अपने परमाणु हथियार विकास कार्यक्रमों को तुरंत बंद करने, न्यूक्लियर शस्त्रीकरण से परहेज करने का आह्वान किया गया था।
इसके अलावा परमाणु हथियारों की तैनाती, परमाणु हथियार पहुंचाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास रोकने, परमाणु हथियारों के लिए विखंडनीय सामग्री का उत्पादन रोकने के लिए कहा गया था। साथ ही उन उपकरणों, सामग्री या तकनीक का निर्यात रोकने को भी कहा गया था, जिनसे न्यूक्लियर हथियारों का निर्माण हो सकता है।
DRDO द्वारा विकसित 5,000 किमी. रेंज की अग्नि-5 मिसाइल एक लॉन्च में कई लक्ष्यों को नष्ट करने की क्षमता रखती है। इसके दायरे में चीन और पाकिस्तान भी आते हैं। इसके अलावा यह मिसाइल सभी एशियाई देशों, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
लगभग 17 मीटर लंबी, 2 मीटर चौड़ी, तीन चरणों की ठोस ईंधन वाली मिसाइल 1.5 टन का पेलोड ले जा सकती है और इसका वजन लगभग 50 टन है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस, इजरायल और उत्तर कोरिया के बाद भारत अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल रखने वाला आठवां देश है। अग्नि-5 मिसाइल को देश के किसी भी कोने में रेल, सड़क या हवा कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
चीन की चिंता इसलिए भी है, क्योंकि पांच हजार किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम मिसाइल चीन के कई शहरों तक पहुंच सकती है। इस मिसाइल से भारत की सैन्य शक्ति में महत्वपूर्ण रूप से मजबूती आने की उम्मीद है।
यूएनएससी के प्रस्ताव का हवाला देते हुए भारत के मिसाइल कार्यक्रम पर सवाल उठाने वाला चीन खुद दशकों से पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के विकास में सहायता कर रहा है।
चीन ने पाकिस्तान को यूरेनियम की सहायता देने के अलावा न्यूक्लियर मिसाइलों के लिए तकनीक भी उपलब्ध कराई है। चीन का पाकिस्तान को यह सहयोग अभी भी बेरोकटोक जारी है और तीन साल पहले इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार भी किया गया था।
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