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मासूमों को तालिबान से बचाने के लिए विदेशी सैनिकों को सौंप रहे अफगानिस्तानी

मासूम बच्चों को किसी भी तरह बाहर भेजने के लिए नाटो सैनिकों को उनके हवाले कर रहे हैं ताकि वो इस खूनी तालिबान शासन से बच सकें।

काबुल: तालिबान के क्रूर शासन से बचने के लिए अफगानिस्तान में लोग किसी भी हाल में देश से बाहर जाना चाहते हैं। स्वयं के बाहर नहीं जाने की सूरत में अपने मासूम बच्चों को किसी भी तरह बाहर भेजने के लिए नाटो सैनिकों को उनके हवाले कर रहे हैं ताकि वो इस खूनी तालिबान शासन से बच सकें।

ऐसी ही एक फोटो जिसमें कुछ महीने के मासूम को कंटीली तारों से घिरे दीवार के पार नाटो सैनिक को लोग अपना बच्चा सौंप रहे हैं। काबुल एयरपोर्ट पर अब भी बड़ी संख्या में अफगान नागरिक अपने परिवारों के साथ खुद को यहां से निकाले जाने का इंतजार कर रहे हैं। ये लोग कई दिनों से भूखे-प्यासे एयरपोर्ट के बाहर बैठे हुए हैं।

इस बीच काबुल एयरपोर्ट की 18 फीट ऊंची दीवार पर खड़े अमेरिकी सैनिक के हाथ में टंगी एक बच्ची की काफी चर्चा हो रही है। एयरपोर्ट पर खड़े लोग अपने बच्चों को नाटो सैनिकों के हवाले कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अमेरिकी या नाटो सैनिक हमें नहीं लेकर जा सकते तो हमारे बच्चों को लेकर जाएं। ये लोग अपने बच्चों को जबरदस्ती एयरपोर्ट की सुरक्षा चारदीवारी के पार पहुंचा रहे हैं।

सीरियाई शरणार्थी एलन कुर्दी की याद ताजा हुई

एलन कुर्दी एक सीरियाई शरणार्थी बच्चा था। 2015 में युद्धग्रस्त सीरिया से जान बचाकर भाग रहे 12 प्रवासियों की नाव डूबने से इस बच्चे की लाश तुर्की के तट पर बहकर आ गई थी। इस बच्चे की तस्वीर ने सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि कई देशों की संसदों में भी जमकर हंगामा मचाया था। यूरोप में इस तस्वीर के कारण युद्ध की विभीषिका, शरणार्थियों या प्रवासियों की समस्या और बच्चे की मौत की मार्मिक तस्वीरों को छापने या न छापने जैसे मामलों पर खूब बहस भी हुई थी।

फोन और इंटरनेट बंद कर रहा तालिबान

एमनेस्टी इंटरनेशनल के प्रमुख आग्नेस कालामार्ड ने कहा कि नृशंस हत्याएं तालिबान के पिछले रिकॉर्ड की याद दिलाती हैं और इस बात का भयावह संकेत हैं कि तालिबान का शासन होने पर क्या हो सकता है। संस्था ने चेतावनी दी कि हो सकता है कि हत्या के कई मामले सामने ही नहीं आए हों क्योंकि तालिबान ने अपने कब्जे वाले कई क्षेत्रों में फोन सेवाएं काट दी हैं ताकि लोग तस्वीरें प्रसारित नहीं कर सकें।

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