
जानलेवा ‘निमोनिया’ ने दस्तक दे दी है। कई जगहों पर तो कहर बरपा रहा है। लोग खौफजदा इसलिए हैं क्योंकि बात बच्चों के स्वास्थ्य की है। वैसे, अभी तक अधिकांश एशियाई देश ही इस बीमारी की चपेट में है। संभावित खतरों को देखते हुए सभी देश मेडिकल अलर्ट पर हैं क्योंकि निमोनिया का केंद्र चीन में है। कोविड का केंद्र भी चीन ही था। निमोनिया फैलने की खबर के बाद दुनिया में आवाज उठने लगी है कि क्यों चीन मानव स्वास्थ्य का दुश्मन बना हुआ है? सच्चाई चीन ही जानता है। पर, कोविड-19 को फैलाने का ठप्पा तो उसके माथे पर चस्पा है। अब नई आफत निमोनिया ने खड़ी कर दी। निमोनिया को लेकर भी चीन दुनिया के निशाने पर है।

चीन में रहस्यमय निमोनिया की चपेट में ज्यादातर बच्चे ही आ रहे हैं। लाखों स्कूली इससे प्रभावित हैं। विगत कुछ दिनों से वहां के तमाम अस्पताल निमोनिया पीड़ित बच्चों से खचाखच भरे हैं। फिलहाल, चीन इस बीमारी को अज्ञात बता रहा है। चिकित्सा विज्ञान ने इसका नामकरण ‘एवियन इन्फ्लुएंजा’ से किया है। वायरस भी बता रहे हैं। वायरस को ‘एच9-एन2’ नाम दिया है। लेकिन पूर्ववर्ती सच्चाइयों पर गौर करें तो इससे पहले भी आई फ्लू, स्वाइन फ्लू, कोरोना और अब ये ‘एवियन इन्फ्लुएंजा’ सभी चीन ने ही दुनिया को बिन मांगे दिए हैं। डब्ल्यूएचओ ने हमेशा की तरह सावधानी बरतने को कहा है। चीन का वुहान चिकित्सीय प्रयोगशाला मेडिकल रिसर्च के लिए पहेली बना हुआ। क्योंकि वहां के निर्मित वायरस और जैविक अनुसंधान, अजन्मी बीमारियां, घातक वायरस और उनके सब-वेरिएंट संसार पर कहर ढा रहे हैं। ताज्जुब इस बात का है कि सबकुछ जानते हुए भी ग्लोबल स्तर के तमाम तथाकथित वैश्विक स्वास्थ्य संगठन न तो चीन को जवाबदेह ठहरा रहे हैं और न ही कोई कार्यवाही करने का मन बनाते हैं।

चिकित्सा विज्ञान को तय करना है कि वास्तव में निमोनिया के पीछे चीन की हिमाकत है या नहीं। इस पर अभी कुछ कहा भी नहीं जा सकता लेकिन संदेह की कई वजहें हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम इसकी खोज में है। शुरुआती जांच पड़ताल में कुछ ऐसे इनपुट उन्हें मिले हैं जिससे संदेह है कि ये स्वनिर्मित वायरस हो सकता है। प्रमाणित होने के लिए अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। फाइनल रिपोर्ट से पहले ही डब्ल्यूएचओ ने चीन को लताड़ते हुए कुछ सवाल-जवाब जरूर किए हैं, जिस पर चीन ने सफाई देकर पल्ला झाड़ लिया है। शक-संदेह के जो बादल चीन पर मंडरा गए हैं, उनसे जल्द छुटकारा पाना संभव नहीं होगा। हर मर्तबा ये सवाल उठता कि ज्यादातर जानलेवा अजन्मी बीमारियां और वायरस चीन में ही जन्म लेते हैं। कोविड के वक्त भी ये बड़ा सवाल खड़ा हुआ था जिसका माकूल जवाब आज तक नहीं मिल पाया।
बहरहाल, चाइना में फैले रहस्यमय निमोनिया ने न सिर्फ एशिया को, बल्कि समूचे संसार को भयभीत कर रखा है। हालांकि, अभी छुटपुट ही केस सामने आए हैं। दरअसल, संसार कोविड के बाद से भयभीत है, वो महामारी भी चीन से फैली थी, उसके फैलने का अंदाज भी कमोबेश कुछ ऐसा ही था। कोरोना के पहले एकाध केस सामने आए थे, फिर उसने जो विकराल और रौद्र रूप धारण किया, उसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इसी कारण लोग निमोनिया से डरे हुए हैं। लोग सोचते हैं कि कहीं निमोनिया भी कोविड जैसा मंजर न पैदा कर दे। चीनी निमोनिया को देखते हुए भारतीय हेल्थ विभाग पूरी तरह चौकन्ना है। दिल्ली से स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट पर रहने के आदेश दिए हैं। इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने खुद समीक्षा बैठक करके स्थिति का जायजा लिया हैं। ये अच्छी बात है कि कोई संभावित समस्या बढ़े, उससे पहले ही बचाव की तैयारियां पूरी कर ली जाएं।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
(HS)


