
Ranchi : झारखंड में छात्रों के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मनोज यादव ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सभी परीक्षाएं रद्द करने की मांग दोहराई है।

उन्होंने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

छात्र मनोज यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से झारखंड आकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस तरह दोनों नेताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलनों और प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए धरनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, उसी प्रकार उन्हें झारखंड में भी छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के नेता प्रतिपक्ष हैं और उन्हें झारखंड आकर यह संदेश देना चाहिए कि वह राज्य के छात्रों के साथ खड़े हैं। यदि जरूरत पड़ी तो राहुल गांधी को राज्य सरकार या केंद्र सरकार, जिस किसी से भी संघर्ष करना पड़े, छात्रों के हित में आवाज उठानी चाहिए।
मनोज यादव ने यह भी कहा कि छात्र फिलहाल राज्य सरकार के साथ किसी तरह की वार्ता नहीं चाहते। उनका कहना है कि बातचीत तभी संभव होगी, जब सरकार जेपीएससी और जेएसएससी की सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा करेगी। उन्होंने भाजपा की ओर से सीबीआई जांच की मांग का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2003 से पहले और दूसरे जेपीएससी से जुड़े मामलों की जांच अब तक चल रही है। ऐसे में केवल जांच की मांग पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के हित में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर सीएम हेमंत सोरेन के बयान पर एक छात्रा ने कहा, “मुझे लगता है कि दादा ने आखिरकार हमारी बात सुन ली है। जैसा कि आपने देखा होगा, एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिन परीक्षाओं को लेकर हमने सवाल उठाए थे, अब उनकी जांच हो रही है।”
छात्रा ने कहा, “चाहे सीआईडी हो या ईडी, हमारा मकसद बिल्कुल अलग है। हमारी बस यही मांग है कि जो भी एजेंसी जांच करे, वह ईमानदारी और निष्पक्षता से करे।”
इसी बीच, छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर कांग्रेस नेता अंबा प्रसाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “हम नैतिक रूप से, तन-मन और संसाधनों के साथ छात्रों का पूरा समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि मैं खुद भी इस एक छात्रा रही हूं और मैंने इस दर्द को महसूस किया है। मैं जानती हूं कि जब आपके सालों की मेहनत, आपकी उम्मीदें और अपेक्षाएं टूट जाती हैं तो कैसा दर्द होता है। यह कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। एफआईआर में ऐसे अधिकारियों के नाम क्यों शामिल नहीं किए गए? उनके नाम भी शामिल किए जाने चाहिए। इस खराब सिस्टम को ठीक करने के लिए एजेंसियों के जरिए आउटसोर्सिंग का तरीका बंद किया जाना चाहिए।” (IANS)



