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सदन में निशिकांत दुबे ने ऐसा क्या कहा कि अधीर रंजन हो गए ‘अधीर’

New Delhi: लोकसभा में सोमवार को महंगाई पर चर्चा (Price Rise Discussion) हुई। महंगाई पर चर्चा के दौरान कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बीते 14 महीने से महंगाई दोहरे अंक में है और यह 30 साल में सबसे अधिक है। वहीं बीजेपी की ओर चर्चा में भाग लेते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने कहा कि आज दुनिया में कोविड (Covid 19) और रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) के बाद गेंहू का उत्पादन पूरे विश्व में एक प्रतिशत घट गया, चावल का उत्पादन .5 प्रतिशत घटा है। चीनी का प्रोडक्शन घटा है। क्या हमने दुनिया के किसानों को कहा कि प्रोडक्शन कम करो। क्या युद्ध हमारी वजह से हो रहा है। आज हमारे प्रधानमंत्री 80 करोड़ गरीब लोगों को फ्री का खाना दे रहे हैं तो क्या हमें उन्हें बधाई नहीं देना चाहिए। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आपत्ति जताई।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी सदन में खड़े हो गए जिसके जवाब में निशिकांत दुबे ने कहा कि बैठ जाइए सुनना पड़ेगा। यदि फंड शब्द पर आपत्ति है तो सहायता देने की कोशिश यह शब्द तो ठीक है। उन्होंने कहा कि टमाटर, आलू ,प्याज के भाव मार्च में क्या थे और अब क्या है। क्या इसके लिए सरकार को बधाई नहीं देना चाहिए। उनके इस बयान पर कांग्रेस सदस्यों की ओर से दोबारा हंगामा शुरू हो गया। निशिकांत दुबे ने नूर का शेर सुनाया कहा कि सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे, झूठ की कोई इंतहा नहीं। कांग्रेस का झूठ का इतिहास है और वह किसी चीज पर बहस नहीं करना चाहती।

कोविड और युद्ध के बावजूद देश की हालत बेहतर: निशिकांत दुबे

एमपी निशिकांत दुबे ने कहा कि कोविड के बाद अनेक देशों की हालत खराब है, सभी जगह रोजगार छिन रहे हैं। मुद्रास्फीति बढ़ रही है, उस स्थिति में भी यह देश बदल रहा है, खुश है और यहां गांव, गरीब, आदिवासी किसान को सम्मान मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस सरकार के आने से पहले सदन में किसानों की आत्महत्या के विषय पर कई बार बात होती थी लेकिन पिछले आठ साल में किसानों की आत्महत्या का विषय सदन में एक भी बार नहीं उठा क्योंकि इस सरकार ने किसानों को ताकत दी है और वे आत्महत्या करने को मजबूर नहीं हो रहे हैं।

2020 के बाद से 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक भारत सरकार को लौटाना पड़ रहा: निशिकांत

एक खबर का हवाला देते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि 2011 से लेकर 2014 तक भी बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत एक हजार से अधिक थी। कांग्रेस ने पब्लिक को मूर्ख बनाने, वोटबैंक की राजनीति के लिए ऑयल बांड जारी किये। जिसके एवज में 2020 के बाद से 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक भारत सरकार को लौटाना पड़ रहा है।

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