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JPSC छठी सिविल सर्विस परीक्षा से नियुक्त अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, HC का फैसला निरस्त

Ranchi: झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की छठी सिविल सर्विस परीक्षा के जरिए नियुक्त हुए अफसरों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम ने कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) के एक फैसले के चलते इस परीक्षा की मेरिट लिस्ट से बाहर हुए 62 अभ्यर्थियों को नौकरी में बरकरार रखने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की छठी सिविल सर्विस परीक्षा में कुल 326 अभ्यर्थी चुने गये थे। इस परीक्षा में जेपीएससी की ओर से अपनाये गये माकिर्ंग पैटर्न को नियमों के विपरीत बताते हुए कुछ अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने माकिर्ंग पैटर्न को गलत ठहराते हुए संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने का आदेश दिया था। इसके बाद जेपीएससी ने संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की, तो पुरानी मेरिट लिस्ट में शामिल 62 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया।

प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के फैसले और जेपीएससी के संशोधित रिजल्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रवि कुमार की खंडपीठ ने याचिका पर बीते 28 जुलाई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए पुरानी मेरिट लिस्ट के अनुसार चुने गये सभी 326 अफसरों की सेवा बरकरार रखने का आदेश दिया। रिजल्ट में बाहर किए गए अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने पक्ष रखा।

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