
Deoghar: देवघर का प्रशासन संवैधानिक संकट से गुजर रहा है। यहां के डीसी संविधान के हिसाब से नहीं चलते। ये कहना है गोड्डा लोकसभा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे का। उन्होंने कहा जिस तरह देवघर डीसी द्वारा हालात डेवलप किया जा रहा है। उनके पास जेल जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

शुक्रवार को देवघर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने जानकारी दी कि झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस अपने परिवार के साथ देवघर पूजा-अर्चना करने आने वाले थे। जिसके लिए उनके कार्यालय से तीन दिन लगातार फोन यहां के जिलाधिकारी को किया गया। लेकिन राज्यपाल ऑफिस का कॉल पर देवघर डीसी ने नहीं आये। जिसके बाद राज्यपाल द्वारा डॉ. निशिकांत को इस बात की जानकारी दी गयी।

उन्होंने कहा राज्यपाल रमेश बैस से उनके व्यक्तिगत संबंध हैं। उनसे काफी कुछ उन्होंने सीखा है। डॉ. निशिकांत ने बताया कि देवघर डीसी द्वारा राज्यपाल का फ़ोन नहीं उठाने की जानकारी मिलने पर तुरंत मुख्य सचिव को इस बात की जानकारी दी गयी। जिसके बाद ADC से बात मुख्य सचिव द्वारा की गयी।
डॉ. निशिकांत ने कहा कि 13 सालों में तमाम शासन देखें हैं। लेकिन कभी भी इस तरह का संवैधानिक ब्रेक डाउन नहीं देखा। कभी भी इस तरह का भ्रष्टाचार नहीं देखा। कभी भी इस तरह का घटिया प्रशासन नहीं देखा। जिसको संविधान के किसी पद के बारे में कोई वैल्यू नहीं है।
डॉ. दुबे ने कहा देवघर डीसी को लेकर कहा कि जो आदमी जिस बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान के कारण आईएएस बना है। हाई कोर्ट से बाहर निकलते ही अंबेडकर को कोट करते हुए पोस्ट करता है कि संविधान को जला देना चाहिये।
सांसद ने बताया कि उन्होंने राज्यपाल को आग्रह किया है कि देवघर डीसी के खिलाफ 256 के तहत डीओपीटी में चिट्ठी लिखनी चाहिए और जिस तरह के हालात डेवलप हो रहे हैं आज नहीं तो कल डिसमिशिन और जेल जाने के अलावा देवघर डीसी के पास कोई विकल्प नहीं रहेगा।
सांसद ने कहा कि ये लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संवैधानिक ब्रेक-डाउन का एक बड़ा भार देना चाहिए।


