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Jharkhand Police ने दिया नया जीवन: क्राउड फंडिंग कर कराया ASI का लंग्स ट्रांसप्लांट

रजनीकांत बताते हैं कि पहली बार 31 जुलाई 2020 को ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे। 8 अगस्त को निगेटिव होने के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट आए थे।

रांची: कोरोना काल में ड्यूटी करते हुए संक्रमित हुए ASI रजनीकांत के दोनों लंग्स ने काम करना बंद कर दिया था। तमाम इलाज के बाद जब रजनीकांत ने उम्मीद छोड़ दी थी तब झारखण्ड पुलिस (Jharkhand Police) मसीहे की तरह सामने आया और ASI रजनीकांत को नया जीवन दिया।

कोरोना काल के दौरान PCR में तैनात रजनीकांत को रांची के सबसे बड़े क्वारेंटाइन सेंटर खेलगांव में तैनात किया गया था। यहीं लोगों की सेवा के दौरान वे संक्रमित हो गए थे। ड्यूटी करते हुए ASI रजनीकांत जब कोरोना से संक्रमित हुए तब दोनों लंग्स ने काम करना बंद कर दिया था। रजनीकांत ने रांची, पटना, दिल्ली हर जगह इलाज कराया लेकिन वे स्वस्थ नहीं हो पा रहे थे। तब उन्हें चिकित्सकीय सलाह दी गई कि लंग्स ट्रांसप्लांट कराना होगा। लेकिन लंग्स ट्रांसप्लांट का बजट 60 लाख रुपए आ रहा था। जो ASI रजनीकांत के परिवार के लिए ये बड़ी रकम थी।

ऐसे दौर में विभाग उनकी मदद के लिए आगे आया। विभागीय मदद के अलावा उनके सहयोगियों ने उनके लिए क्राउंड फंडिंग शुरू की और पैसा जुटाया। राशि जुटने के बाद एक साल से इलाजरत रजनीकांत के 13 अक्टूबर को सिकंदराबाद के कीम्स में दोनों लंग्स ट्रांसप्लांट किया गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।

रजनीकांत बताते हैं कि पहली बार 31 जुलाई 2020 को ड्यूटी के दौरान संक्रमित हुए थे। 8 अगस्त को निगेटिव होने के बाद दोबारा ड्यूटी पर लौट आए थे। 23 अगस्त को कोरोना ने दोबारा गिरफ्त में ले लिया। 3 सितंबर को निगेटिव तो हो गए, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए। इसके बाद 4 महीने तक एम्स पटना में उनका इलाज चला। फिर एम्स दिल्ली भी गए। संक्रमित होने से लेकर लंग्स ट्रांसप्लांट तक की प्रक्रिया आसान नहीं थी। लेकिन विभाग से भरपूर मदद मिली।

रजनीकांत बताते हैं कि पहले सुविधा के लिए मुख्यालय से रांची से टाटा ट्रांसफर किया गया। और अब जब आर्थिक सहयोग की जरूरत पड़ी परिजनों के साथ साथ विभाग ने भरपुर मदद की। रजनीकांत ने कहा कि वो हमेशा विभाग का शुक्रगुजार रहेंगे।

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