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रांची में भारत बंद का मिला-जुला असर

कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर बुलाये गये भारत बंद के समर्थन में झारखंड में भी राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे।

रांची: कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर बुलाये गये भारत बंद के समर्थन में झारखंड में भी राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की।

कई जगह पर सड़क जाम किया। इस दौरान कई जगहों पर दुकानें बंद रहीं। सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ। बंद के दौरान रांची में बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। हालांकि अन्य दिनों की अपेक्षा सड़कों पर वाहन चलते देखे गए। दुकानें और बाजारे भी खुली रही। बंद समर्थकों ने अल्बर्ट एक्का चौक के समीप कुछ दुकानों को बंद कराया।

बंद के समर्थन में रांची में झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदल, IUML सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और सभी ने एक साथ सड़क पर उतरकर कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि देश के किसान, मजदूर, आवाम और जवान सभी इस आंदोलन के साथ हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जमीन से लेकर आसमान तक का सौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करने का काम किया है।

सुप्रियो ने केंद्र सरकार को थेथर (एक तरह का पौधा) का संज्ञान देते हुए कहा कि “थेथर” का इलाज सिर्फ झारखंडियों के पास है। उसी का पहला डोज देने के लिए हम सभी साथ आए हैं। मौके पर हजारीबाग के पूर्व सांसद और भाकपा माले के नेता भुनेश्वर मेहता ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर देश के 40 किसान संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया है।

उन्होंने कहा कि भारत बंद में देश के सभी मजदूर संगठनों का भी साथ मिला है। उन्होंने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानून को वापस नहीं लिया जाता है, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

भाकपा माले के नेता और हटिया विधानसभा के पूर्व उम्मीदवार सुभाष मुंडा ने कहा कि देश के किसान और मजदूर संगठित हैं। कृषि कानून और मजदूर विरोधी कानून के खिलाफ देशभर में आक्रोश है, जिसकी बानगी रांची में भी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि देश के किसान नौ महीने से आंदोलन कर रहे हैं।अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हठधर्मिता छोड़ देनी चाहिए। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश महासचिव कमलेश यादव ने कहा कि 2024 में भाजपा सरकार की देश से विदाई तय है। राजद के महासचिव इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य भर में राजद के नेता और कार्यकर्ता सक्रिय होकर किसान बिल के विरोध में आज सड़कों पर उतरे हैं। जबकि युवा राजद के राष्ट्रीय महासचिव विशु विशाल ने कहा कि आज किसान बिल के विरोध में लोगों ने स्वतः बंद का समर्थन किया है

कांग्रेस पार्टी के नेता भी बंद कराने के लिए झंडा-बैनर हाथों में लेते हुए नारेबाजी करते हुए अलबर्ट एक्का चौक पहुंचे और वहां सड़क पर बैठक कर प्रदर्शन किया। इसके पूर्व अलबर्ट एक्का चौक से सर्जना चौक होते हुए जैन मंदिर, पुस्तक पथ, रंगरेज गली, गांधी चौक, महावीर चौक के दुकानदारों से आग्रह किया कि वह अपने-अपने प्रतिष्ठानों को बंद रखें। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के आग्रह पर लोगों ने स्वतः बन्द का समर्थन किया और अपने अपने प्रतिष्ठानों को बंद किया। भारत बंद के समर्थन में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, राकेश सिन्हा, डॉ राकेश किरण महतो, सतीष पॉल मुंजनी, अमुल्य नीरज खलखो, रवीन्द्र सिंह, गुंजन सिंह सहित कई लोग मौजूद थे।

मौके पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि केन्द्र सरकार इस देश में लोकतंत्र का हनन कर रही है, संविधान को कुचल रही है, बेरोजगारी चरम पर है, देश के अन्नदाता नौ माह से सड़कों पर आंदोलनरत हैं लेकिन भाजपा की सरकार अपने अहंकार और तानाशाही रवैये से देश के अन्नदाताओं को आत्महत्या करने को विवश कर रही है। इसी के खिलाफ किसान संघर्ष मोर्चा द्वारा आहूत भारतबंद का समर्थन करते हुए कांग्रेस सहित सभी गैर भाजपाई दलों के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरने का काम किया।

दूसरी ओर बंद के मद्देनजर अल्बर्ट एक्का चौक सहित अन्य चौक चौराहे पर पुलिस के जवान तैनात थे। वहीं, सड़कों के प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था भी कुछ घंटों के लिए बाधित हुई।

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