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कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों को प्यार का मरहम लगाने पहुंचे Justice अपरेश कुमार सिंह

झारखण्ड HIGH COURT के न्यायाधीश सह JHALSA रांची के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस अपरेश कुमार सिंह (Justice Aparesh Kumar Singh) प्रोजेक्ट शिशु (Project Shishu) के अंतर्गत खुद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।

रांची: झारखण्ड HIGH COURT के न्यायाधीश सह JHALSA रांची के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस अपरेश कुमार सिंह (Justice Aparesh Kumar Singh) प्रोजेक्ट शिशु (Project Shishu) के अंतर्गत खुद पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। माण्डर प्रखण्ड के गुरगुरजारी के चारों अनाथ बच्चों को अंतरिम मुआवजा दिया।

विगत दिनों घटी घटना जो माण्डर प्रखण्ड के गुरगुरजारी की है, जिसमें कोरोना काल में चारों बच्चों के माता-पिता का देहांत हो गया था। घर पर सिर्फ एक बूढ़े दादा बचे हैं। 

जानकारी हो कि कोरोना काल में कुलदीप उरांव और उनकी पत्नी गंगोत्री उराईंन की मृत्यु हो गयी चारों बच्चे मनिषा उरांव, उम्र-16 वर्ष, संजीत उरांव, उम्र-13 वर्ष, सूरज उरांव-उम्र 11 वर्ष तथा श्रृष्टि उरांव -5 वर्ष बेसहारा हो गये हैं। ऐसे में झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यपालक अध्यक्ष अपरेश कुमार सिंह के द्वारा लाँच किये गये प्रोजेक्ट शिशु के तहत न्यायाधीश ने स्वयं चारों बच्चों के घर जाकर उनसे मुलाकात की और उन्हें इस प्रोजेक्ट के तहत दी जाने वाली लाभों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी ली।

जस्टिस अपरेश ने तत्काल अंतरिम सहायता के रूप में परिवार को 10 हजार रूपये का चेक दिया और बच्चों के दादा को पेंशन के लाभ से संबंधित दस्तावेज भी प्रदान किये। न्यायाधीश के निर्देश पर जिला प्रशासन के द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ संबंधित परिवार को दिया गया। साथ ही साथ चारों बच्चों का नामांकन प्रखण्ड के विद्यालय में कराने की अनुशंसा की गयी है। इसके साथ ही साथ चारों बच्चों को स्पाॅनसरशिप स्कीम के तहत जोड़कर तीन माह का राशि प्रदान किया गया। 

झालसा के द्वारा उस परिवार को आवश्यक सामग्री भी प्रदान की गयी, साथ ही साथ उनके परिवार के सभी व्यक्तियों का मेडिकल चेक-अप कराया गया। किताबे एवं पढ़ाई से संबंधित सामग्रियों का भी वितरण किया गया। 

मौके पर न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह के द्वारा झालसा, डालसा, रांची एवं जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया गया कि बच्चियों के व्यस्क होने तक उनके सर्वांगीन विकास के लिए उठाये जा रहे सम्पूर्ण कदमों की अद्यतन जानकारी दी जानी चाहिए, जिसके माध्यम से बच्चों का ध्यान रखा जायेगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ के संबंध में प्रति माह नजर रखी जायेगी, जिससे कि बच्चों के पढ़ाई-लिखाई एवं सुविधाएं मिले।

बता दें कि झारखण्ड में कोविड-19 काल में अनाथ हुए बच्चों की संख्या को ध्यान में रखते हुए न्यायाधीश झारखण्ड उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा के पहल पर प्रोजेक्ट शिशु लाँच किया गया है, जिसके तहत अनाथ हुए बच्चों का डाटाबेस तैयार किया जा रहा है और उनके पुनर्वास के संबंध में कदम उठाये जा रहे हैं।

न्यायाधीश द्वारा खुद विगत दिनों में गुमला, तमाड़, रामगढ़, जमशेदपुर एवं राज्य के अन्य गाँव में जाकर अनाथ बच्चों से मुलाकात की है, और उन्हें भी योजनाओं का लाभ दिया गया है।

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