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Jharkhand के Deoghar Ropeway Accident के बाद केंद्र ने राज्यों से अपनी रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा करने को कहा

झारखंड के देवघर में त्रिकूट हिल्स में दुर्घटना (Accident in Trikoot Hills in Deoghar, Jharkhand) के मामले में केंद्र सरकार ने राज्यों से (Central government from the states) अपनी सभी रोपवे परियोजनाओं के संबंध में स्थिति की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

New Delhi: झारखंड के देवघर में त्रिकूट हिल्स में दुर्घटना (Accident in Trikoot Hills in Deoghar, Jharkhand) के मामले में केंद्र सरकार ने राज्यों से (Central government from the states) अपनी सभी रोपवे परियोजनाओं के संबंध में स्थिति की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

केंद्रीय गृह सचिव ने अजय भल्ला ने इस संबंध में राज्यों को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि राज्य सुनिश्चित करें कि रोपवे के संचालन और रखरखाव के लिए आकस्मिक योजनाएं और सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था लागू हो। उन्होंने रोपवे से जुड़ी आकस्मिक स्थितियों से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल करने के भी निर्देश दिए। साथ ही राज्य मानक प्रक्रिया (SOP) और आकस्मिक योजना के अनुसार रोपवे संचालन के संबंध में तैयारियों के उपायों की नियमित रूप से समीक्षा करने के लिए एक उपयुक्त स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को नामित करें।

गृह सचिव ने कहा कि रोपवे परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए बीआईएस मानक पहले ही निर्धारित किए जा चुके हैं, जिनका ईमानदारी से पालन करने की आवश्यकता है। इस संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) से लिया जा सकता है।

उन्होंने अपने पत्र में कहा कि राज्य सरकार को प्रत्येक रोपवे परियोजना की सुरक्षा ऑडिट करने के लिए एक अनुभवी और योग्य फर्म या संगठन को नियुक्त करना चाहिए। रोपवे का संचालन करने वाली संस्था को ऑडिट से उत्पन्न होने वाले सभी मुद्दों का समाधान करना चाहिए। साथ ही प्रत्येक रोपवे परियोजना के लिए एक रखरखाव नियमावली तैयार की जानी चाहिए। रखरखाव नियमावली के अलावा एक रखरखाव कार्यक्रम होना चाहिए ताकि सुरक्षा मानक अच्छे उद्योग प्रथाओं के अनुरूप हों। रोपवे का संचालन करने वाली संस्था को रखरखाव कार्यक्रम के हिस्से के रूप में की जाने वाली सभी गतिविधियों का रिकॉर्ड रखना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि झारखंड के देवघर में त्रिकूट हिल्स में एक दुर्घटना में 59 व्यक्तियों को लेकर 18 ट्रॉलियां हवा में फंस रहीं। भारतीय वायु सेना, एनडीआरएफ, भारतीय सेना, आईटीबीपी और स्थानीय प्रशासन के साहसिक प्रयासों के बाद फंसे इन व्यक्तियों को बचाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद तीन लोगों की जानें चली गईं।

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