
Muzzafarpur: मुजफ्फरपुर में 16 मरीजों की आंख निकालने और 27 लोगों को अंधा बना देने के मामले के तूल पकड़ने के बाद कार्रवाई शुरू हो गयी है। बिहार स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद कैंप से जुड़े मामले की जांच रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य प्रशासन से मांगी थी। जिसे लेकर सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल और एसकेएमसीएच (SKMCH) में भर्ती मरीजों से पूछताछ की थी।

बिहार के मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल (Muzaffarpur Eye Hospital) के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट भेज दी गई है।

उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में मामला लापरवाही का लग रहा। साथ ही उन्होंने बताया कि अस्पताल को अभी फिलहाल बंद कर दिया गया है। जिन लोगों के आंखें खराब हुई हैं, उन्होंने एक संस्था के जरिए संचालित मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन (cataract surgery) करवाया था।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस घटना को लेकर बिहार सरकार को नोटिस भेजा है। एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि उसने मीडिया में आई एक खबर पर स्वत: संज्ञान लिया है कि 22 नवंबर को मुजफ्फरपुर नेत्र अस्पताल में हुई मोतियाबिंद सर्जरी के बाद ‘श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं।’
आयोग ने कहा- चिकित्सा नियमों के अनुसार एक डॉक्टर अधिकतम 12 सर्जरी कर सकता है, लेकिन इस मामले में डॉक्टर ने 65 मरीजों की सर्जरी की। इस तरह चिकित्सा नियमों का उल्लंघन कर लापरवाह तरीके से आंखों की सर्जरी करना गंभीर चिंता का मामला है। आयोग ने बिहार सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।


