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Corona की जांच में कमी चिंता की बात: WHO

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना संक्रमण की जांच में आयी कमी पर चिंता व्यक्त करते हुये आशंका जाहिर की है कि हो सकता है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में आयी गिरावट वास्तविक न हो।

Geneva: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना संक्रमण की जांच में आयी कमी पर चिंता व्यक्त करते हुये आशंका जाहिर की है कि हो सकता है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में आयी गिरावट वास्तविक न हो।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कोरोना संक्रमण के मामलों में आयी कमी के कारण कई देशों में प्रतिबंधों को हटाये जाने के साथ ही कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच की गति भी काफी धीमी हो गयी है, जो बहुत बड़ी चिंता की बात है।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, डब्ल्यूएचओ की एपिडेमोलॉजिस्ट मारिया वान केरखोव ने ऑनलाइन सवालों का जवाब देते हुये कहा कि वायरस की निगरानी करनी बहुत जरूरी है।

मारिया ने कहा, हमें इस बार में रणनीतिक होना होगा लेकिन हम इसे पूरी तरह छोड़ नहीं सकते हैं। इसके साथ ही कोविड-19 के लिये जो सर्विलांस प्रणाली स्थापित की गयी है, उसे हम खत्म होते नहीं देख सकते हैं।

मारिया ने आशंका व्यक्त की है कि हो सकता है कि कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आने की रिपोर्ट वास्तविक न हो। उनका कहना है कि जब कोरोना संक्रमण की जांच दर ही कम होगी तो संक्रमण के सटीक मामले कैसे पता चल पायेंगे।

उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण होने वाली मौत के आंकड़ों की सटीकता पर भी सवाल उठाये। गत सप्ताह कोरोना संक्रमण के कारण लगभग 68,000 मौतें हुई हैं, जो मौत के मामलों में आयी कमी को दर्शाता हुआ आंकड़ा है लेकिन मारिया के अनुसार मौत की रिपोर्ट सही नहीं भी हो सकती है।

कोरोना के ओमीक्रॉन वैरिएंट के कारण आयी तीसरी लहर के सुस्त पड़ने से ब्रिटेन सहित दुनिया भर के कई देशों ने कोविड प्रतिबंध हटा दिये हैं लेकिन डब्ल्यूएचओ ने यह संभावना जतायी है कि वायरस के घूमते रहने से इसके और कई वैरिएंट अभी सामने आयेंगे।

हालांकि, डब्ल्यूएचओ यह स्पष्ट रूप से नहीं बता सका है कि कोरोना के नये वैरिएंट कितने अधिक संक्रामक या घातक हो सकते हैं। इस हालत में कोरोना संक्रमण की जांच जरूरी हो जाती है ताकि समय रहते ही संक्रमण का पता लग जाये और उसका अधिक प्रसार न हो पाये।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में कोरोना संक्रमण की जांच की गति तेज रहने से संक्रमण का पता समय रहते चल जाता है जिससे पहला लाभ तो यह होता है कि संक्रमित व्यक्ति का उपचार जल्दी शुरू हो जाता है और उसकी हालत गंभीर नहीं हो पाती तथा इसका दूसरा फायदा यह है कि वायरस के प्रसार की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है।

कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य संगठनों, शोध संस्थाओं आदि की अलग-अलग राय है। कई बार संगठनों और शोध संस्थाओं में कार्यरत विशेषज्ञों की अपनी राय भी एक-दूसरे से जुदा होती है।

कुछ ऐसा ही मामला डब्ल्यूएचओ का है। डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन का मानना है कि कोरोना वायरस का कहर इस साल खत्म हो जायेगा।

दूसरी तरफ मारिया का कहना है कि अभी सबकुछ खत्म करने का समय नहीं आया है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिये हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी।(IANS)

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