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13 वर्षों के संसदीय सफ़र में निशिकांत दुबे ने खुद को उस कतार में खड़ा तो कर ही लिया है, कि विरोधी भी बगैर नाम लिए सियासी चर्चा की शुरुआत नहीं करते..

कुल मिलाकर वर्तमान सांसद ने खुद को उस कतार में खड़ा तो कर ही लिया है कि, समर्थक हो या विरोधी..बगैर नाम लिए सियासी चर्चा की न तो शुरुआत हो सकती है और न अंत।

Deoghar: बिगाड़ के डर से ईमान की बात भी नहीं कहोगे?... मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंच-परमेश्वर के इस संवाद में यह बात भले ही मुख्य पात्र जुम्मन की खाला ने अलगू चौधरी से कही थी लेकिन, आज भी जब किसी के किए और उसके प्रयास की चर्चा होती है तो आमतौर पर बरबस ही यही जुमला लोगों की ज़ुबान पर आ जाता है। यहां कहानी के पात्र में हैं गोड्डा लोकसभा से तीसरी दफे नुमाइंदगी कर रहे सांसद डॉ निशिकांत दुबे और कहानीकार है क्षेत्र की वो तमाम जनता … जिन्होंने उन्हें पसंद किया या फिर नापसंद, बावज़ूद इसके बतौर सांसद नेता जी ने जितने भी कार्य किए… कार्य के लिए प्रयास किए… या फिर दबी फ़ाइलों पर लिपटी धूल को साफ़ कर उसे एकबार फिर से जनता के बीच पढ़ने लायक बनाया.. कुल मिलाकर वर्तमान सांसद ने खुद को उस कतार में खड़ा तो कर ही लिया है कि, समर्थक हो या विरोधी..बगैर नाम लिए सियासी चर्चा की न तो शुरुआत हो सकती है और न अंत।

साल 2009 से शुरू हुआ एक सफ़र

बिहार के भागलपुर जिला स्थित भवानीपुर…यही वह जगह जहां से चलकर एक शख्स तमाम ज़द्दोज़हद के बाद अपनी ज़िद्द और कुछ करने का जज़्बा लिए धीरे-धीरे सियासत की सीढ़ियों पर कदम बढ़ा रहा था… इस सफर के दौरान उस ज़िद्दी इंसान ने राजनीति-कूटनीति और अपनी काबिलियत के दम पर कई मुकाम हासिल किए… हालांकि, इस बीच कई ऐसे मौके भी आए जब पथरीले और कंटीले रास्तों से भी गुजरना पड़ा… बावज़ूद इसके यह भी एक ज़िद्द ही थी कि, अपने राजनीतिक अग्रजों से आशीर्वाद हासिल करने में कामयाब रहे। और फिर वह दिन भी आया जब साल 2009 की उस शाम गोड्डा लोकसभा क्षेत्र की तकदीर और तस्वीर बदलने की दृढ़ इच्छाशक्ति लिए उसके कदम बाबाधाम की धरती पर पड़े। लेक़िन, उसी शाम एक ऐसी घटना पेश आई जिसके बाद उस ज़िद्दी शख्स के दिलो-दिमाग पर गोड्डा की तस्वीर बदलने का ऐसा पागलपन सवार हुआ जो इतिहास की तारीख में दर्ज हो गया।

उस जिद्दी शख्स के “गुनाहों” की फेहरिस्त भी लंबी है।

तमाम अंदरूनी खींचतान…तोड़-जोड़ और बिगड़े हालात पर अपनी कुशलता और सूझ-बूझ से जीत हासिल करने के बाद आखिरकार उस जिद्दी शख्स पर गोड्डा लोकसभा क्षेत्र की जनता ने भरोसा जताया। जिसने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज कर लोकतंत्र के मंदिर की चौखट पर मत्था टेका। और फिर शुरू हुई अपनी ज़िद्द को पूरा करने की ज़द्दोज़हद, जी हाँ, आम जनता की नज़र में विकास की नई नज़ीर पेश करने वाले उस जनप्रतिनिधि को उनके विरोधी ‘अहंकारी’… ‘घमंडी’ और कॉरपोरेट ‘एजेंट’ के नाम से नवाज़ते हैं। उनकी नज़र में गोड्डा लोकसभा सीट से देश की संसद में नुमाइंदगी करने वाले की फेहरिस्त में उनके ‘गुनाहों’ की लिस्ट भी काफी लंबी है।

तो चलिए एक नज़र डालते हैं डेवलपमेंट के लिए अबतक किए ‘गुनाहों’ पर।

‘गुनाह’ नंबर 1- *पानी*

देवघर की जनता और किसानों के लिए जान को जोखिम में डालकर सालों से सियासत की यूनिवर्सिटी में तब्दील हो चुकी पुनासी परियोजना की कक्षा में ऐसी तालेबंदी की, जिसके बाद से  देवनगरी के निवासियों समेत किसानों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। साथ ही कुटिल राजीनीति की वह दीवार भी भरभरा कर गिर गई। जिसपर सवार होकर कुछ सियासतदां लंबे अर्से से अपनी रोटियां सेंक रहे थे।

गुनाह नम्बर-2 *स्वास्थ्य*

संथाल परगना जैसे पिछड़े प्रमंडल में AIIMS की स्थापना में अपनी भूमिका को लेकर तमाम लोगों ने दावे किए। लेकिन, डॉ निशिकांत दुबे के प्रयास को नजरअंदाज करना अपनी ज़मीर की सौदेबाज़ी करने जैसा है। क्योंकि,  AIIMS निर्माण से लेकर ऑपरेशनल होने तक गोड्डा सांसद लगातार पूरी ताकत के साथ प्रयासरत रहे। विपक्षियों के मुताबिक अगर AIIMS को देवघर में स्थापित करने का प्रस्ताव पिछली सरकार में ही तय हुआ था। तब भी, हकीकत यही है कि, बीते कई वर्षों से फाइल पर पड़ी धूल को साफ कर उसे ज़मीन पर उतारने का श्रेय इसी ‘ज़िद्दी’ शख्स को जाता है।

गुनाह नंम्बर-3 *सड़क*

देवघर समेत गोड्डा संसदीय क्षेत्र के तकरीबन तमाम सुदूर इलाकों की कनेक्टिविटी आज बड़े शहरों से है और कई जगहों पर कार्य जारी है। इसके परिकल्पना की कल्पना भी विपक्ष ने अपने कार्यकाल में नहीं की थी। दरअसल, केंद्र सरकार और सम्बंधित मंत्रालय में लगातार बनाये गए दवाब का ही यह नतीजा है कि, आज संथाल की सड़कों पर गाड़िया बिना हिचकोले खाए सरपट दौड़ रही हैं।

गुनाह नम्बर-4 *रेलवे सुविधा का विस्तार*

आज़ादी के बाद भी अबतक गोड्डा संसदीय क्षेत्र के कुछ गांव बेचिरागी इलाकों की फेहरिस्त में शुमार है। बावज़ूद इसके जहां के लोग पटरी पर दौड़ने वाली ट्रेन के किस्से सुन उसे सपना सरीखा समझ रहे थे। आज उन्ही इलाकों के लोग रेल की आवाज सुन भी रहे हैं और उस सपने को हकीकत में तब्दील होता देख सुकून की सांस भी ले रहे हैं, यह भी उसी ज़िद्दी’ की कोशिश का नतीज़ा है। आज की तारीख में देवघर और गोड्डा से देश के किसी भी कोने में जाने के लिए न सिर्फ रेल की पटरी का जाल बीच चुका है। बल्कि, बाबाधाम से वैष्णोदेवी, त्रिपुरसुंदरी समेत तमाम धार्मिक स्थलों की सुगम यात्रा के लिए बेहतरीन ट्रेन का परिचालन शुरू करवा कर उस इंसान ने अपनी ‘ज़िद्द’ ही पूरी की।

गुनाह नम्बर-5 *बिजली*

गोड्डा की धरती पर पॉवर प्लांट की स्थापना और पलायन पर लगाम के साथ ही रोज़गार का सृजन उसी ज़िद्दी’ की परिकल्पना थी जो साकार हुई, जिस गोड्डा जिले को लेकर कभी किस्से-कहानियां और किवदंतियां मशहूर हुआ करती थी। आज वही जिला विकास की कतार में सीना ताने खड़ा है। गोड्डा के पॉवर प्लांट को सिर्फ बिजली उत्पादन के नज़रिए से देखना भी सही नहीं है। क्योंकि, प्लांट के लिए जिस पाईपलाइन के ज़रिए साहेबगंज से पानी लाने की योजना को कार्यरूप देने पर सहमति बनी थी। उसी वक्त, उस गंगाजल को देवनगरी तक पहुंचाने और देवघर को जलसंकट से निज़ात दिलाने की दूरदर्शी सोच को भी अमलीजामा पहनाया गया था।

गुनाह नम्बर-6 *देवघर एयरपोर्ट*

भले ही देवघर समेत संथाल की जनता देवघर में स्थापित एयरपोर्ट के जल्द शुरू होने का इन्तजार कर रही है। बावज़ूद एक सच्चाई यह भी है कि, DRDO के सहयोग से बने हवाईअड्डे के जल्द निर्माण और इसके शीघ्र संचालन को लेकर भी गोड्डा सांसद लगातार प्रयासरत रहे हैं। एविएशन मंत्रालय से समन्वय से लेकर लगातार निर्माण स्थल का निरीक्षण और सुविधाओं से लेकर गुणवत्ता तक पर व्यक्तिगत रुचि लेने वाला अगर ‘अहंकारी’ है तो यह भी क्षेत्र की जनता के लिए किसी वरदान से कम नहीं।

गुनाह नम्बर-7 *शिक्षा*

जिस गोड्डा लोकसभा क्षेत्र समेत पूरे संथाल के छात्र अपने भविष्य को संवारने और सपनों को साकार करने के लिए कभी दूसरे राज्यों पर निर्भर थे। आज उनके घर में ही मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एग्रीकल्चर कॉलेज समेत तमाम शिक्षण संस्थान मौजूद हैं , यह भी उसी ‘ज़िद्दी’ की कल्पना का नतीज़ा है।

गुनाह नम्बर-8 *पर्यटन का विकास*

गोड्डा संसदीय क्षेत्र अंतर्गत विश्वप्रसिद्ध बाबानगरी देवघर में पर्यटन का विकास और रोज़गार सृजन के साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के मकसद से तमाम कार्यों को अंजाम दिया गया। पार्कों का विकास, सड़को का निर्माण, मंदिर के समीप क्यू कॉम्प्लेक्स से लेकर देशभर से देवनगरी पधारने वाले शिवभक्तों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आज भी वह ‘ज़िद्दी’ शख्स सक्रिय है।

गुनाह नंम्बर-9 *ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण*

इसका सबसे सटीक उदाहरण देवघर के जसीडीह स्थिति दिघीरिया पहाड़ पर बने बायोडायवर्सिटी पार्क के तौर पर सामने है। जो इसी जिद्दी शख्स के प्रयास का नतीजा है।

और…गुनाह नम्बर-10  *कल-कारखाने और इंटरनेट कनेक्टिविटी*

देवघर के जसीडीह इंडस्ट्रियल एरिया में IT पार्क और देवीपुर में प्लास्टिक पार्क का निर्माण साथ ही गोड्डा संसदीय क्षेत्र के तमाम सुदूरवर्ती गांव में भी इंटरनेट की कनेक्टीविटी इस बात का सबूत है कि, तमाम उपरोक्त सभी 10 गुनाह उसी ज़िद्दी’ शख्स ने बीते 10 वर्षों के भीतर किये हैं।

यूं तो क्षेत्र के विकास को लेकर डॉ निशिकांत दुबे की तरफ से हुई पहल और कराए गए कार्यों के गुनाहों की फेहरिस्त और भी लंबी है। लेकिन, मोटे तौर पर सबसे बड़े गुनाहों की कहानी आज सरेआम सीना ताने सबके सामने है। वैसे तो राजनीतिक जीवन में आचरण व्यकितगत होता है, समर्थन, विरोध, वैचारिक मतभेद और चुनावी राजनीति के दौरान की घटनाओं से आम जनता को कोई सरोकार नहीं होता, और जब, हिसाब-किताब के वक्त तराजू पर नेताओं के कर्मों का वजन होता है तब, उस ‘ज़िद्दी’ का पलड़ा सबसे भारी नज़र आता है।

आप भी एक आम नागरिक, एक आम मतदाता, एक आम इंसान की दृष्टि से ज़रूर सोचियेगा, और फैसला करते वक्त उन तमाम चेहरों को भी सामने रखियेगा। जिन्होंने अबतक गोड्डा संसदीय क्षेत्र की नुमाइंदगी की है। निःसन्देह नतीज़ा आपके सामने होगा और आपको अपने फैसले पर गर्व होगा।

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