
देवघर: जीवन में सफल होना चाहते हैं तो एक मजबूत इरादे की जरूरत है। आज हम आपको दो भाइयों लालू और बिट्टू के बारे में बता रहे हैं, जो देवघर के मोबाइल बेचने के कारोबार में जाना-माना नाम हैं। उनके मोबाइल शो रूम का टर्नओवर करोड़ में है। वहीं ऐसा नहीं है कि लालू-बिट्टू को उनका ये कारोबार विरासत में मिला है। इसके लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। आप जानकर हैरान हो जाएंगे अपने संघर्ष के दौरान लालू को घर-घर जाकर देवघर की गलियों में अख़बार तक बेचना पड़ा।
तंगहाली में बीता बचपन

आज हम बात कर रहे हैं देवघर के कृष्णा स्टोर के मालिक कृष्ण कुमार बरनवाल उर्फ़ लालू और शिवनंदन बरनवाल उर्फ़ बिट्टू के बारे में। बचपन से ही उन्होंने कुछ बड़ा करने का सपने देखा। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति के चलते उन्हें अपने सपनों का गला दबाना पड़ा। उनका बचपन काफी तंगहाली में बीता। पांच भाई-बहनों के साथ दोनों देवघर में पले-बढ़े। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खस्ताहाल रही कि बड़े भाई कृष्ण अपनी कॉलेज की पढ़ाई तक पूरी नहीं कर पाए।

नहीं कर पाए पढ़ाई पूरी

40 वर्षीय कृष्ण और 33 वर्षीय शिवनंदन बताते हैं कि घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। बहुत छोटे से उम्र से कृष्ण ने परिवार का खर्चा चलाने के लिए देवघर के वीआईपी चौक पर छोटा सा किराना दुकान शुरू किया। उन दिनों दुकान में 12 से 14 घंटे काम करना पड़ता था। जिसकी वजह से कॉलेज जाने के लिए उनके पास समय और पैसे दोनों ही नहीं थे। इसलिए इंटर तक पढ़ाई कर छोड़नी पड़ी। लेकिन छोटे भाई शिवनंदन को पढ़ाने के लिए संघर्ष जारी रखा। उसे ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी कराई।
घर-घर जाकर बेचे अखबार
उनका संघर्ष यहीं नहीं ठहरा। लालू बताते हैं कि किराना दुकान से घर चलाना आसान नहीं था। इसलिए उन्हें घर-घर जाकर अखबार तक बेचना पड़ा। इस बीच बाजार में मोबाइल फोन का क्रेज बढ़ रहा था। पैसे जमा कर दो-चार हैंडसेट किराना दुकान में ही रखना शुरू किया साथ ही मोबाइल रिचार्ज व कूपन रखने लगे। लेकिन इतने से काफी नहीं था।

आज 20 युवाओं को दे रहे रोजगार
दोनों भाइयों ने कहा कि वह जीवन में तरक्की करना चाहते थे। इसलिए कुछ पैसे इकठ्ठे करने शुरू किये। लालू को छोटे भाई बिट्टू का साथ मिला और उसी किराना दुकान को दोनों भाइयों ने मोबाइल दुकान में तब्दील कर दिया। साल 2006 में कृष्णा मोबाइल स्टोर की शुरुआत की गयी। यह बिजनेस चल निकला। फिर दोनों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ हज़ार रूपये से शुरू हुआ शॉप आज करोड़ टर्नओवर के कारोबार तक पहुंच गया है। जहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 20 युवाओं को रोजगार मिल रहा है।
अपने बुलंद हौसले और कड़े संघर्ष की बदौलत दोनों भाइयों ने अपनी एक छोटी सी दुकान को बड़े शोरूम में तब्दील कर दिया। आज यहां तमाम कम्पनी के मोबाइल फोन, टैब और उससे जुड़े उपकरण मौजूद हैं।
लालू-बिट्टू कहते हैं कि कारोबार में ईमानदारी और धैर्य जरूरी है। हालाँकि फ़िलहाल ऑनलाइन मार्केट ने इनके कारोबार पर काफी असर डाला है। लेकिन मेहनत जारी है।


