
Deoghar: सरकार के नियमानुसार योजनाओं के पूर्ण होने के बाद उसका भौतिक सत्यापन अनिवार्य है। योजना मानक अनुरूप सम्पूर्ण हुआ है या नहीं इसकी जांच अधिकृत अधिकारी के द्वारा करने के बाद ही फंड रिलीज किया जायेगा।

देवघर जिला में भी कई योजनाएं हैं जो पूर्ण होने के बाद अधिकारीयों के भौतिक सत्यापन के दौर में है। लेकिन यहां सवाल ये है कि इन योजनाओं को इन्वेस्टीगेट कौन करेगा। वैसे अधिकारी जिन्हें तकनिकी ज्ञान है, जो ये समझ रहे हैं कि कौन सी योजना किस तरह के मापदंड से तैयार होनी चाहिए या फिर वो जिनकी भूमिका सिर्फ योजनाओ की आर्थिक नीतियां और रणनीति बनाने तक तय है।

दरअसल, देवघर जिला अंतर्गत डीएमएफटी मद से कार्यान्वित हुए दर्जन भर योजनाओं के संयुक्त रूप से भौतिक सत्यापन की जिम्मेवारी जिला प्रशासन की ओर से सहायक अभियंता और परियोजना अर्थशास्त्री को दी गयी है। अब सवाल यही से शुरू हो रहा है।
जानकारों में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है कि आखिर एक अर्थशास्त्री किसी भी योजना को इन्वेस्टीगेट करने में किस तरह की भूमिका निभा सकता है। जबकि ये कार्य तकनीकी ज्ञानकारों का है।


