
Ranchi: झारखंड में हाथियों के बढ़ते जानलेवा हमलों को रोकने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी रणनीति तैयार की है। अब हाथियों का आतंक रोकने के लिए हनी ट्रैप आजमाया जा रहा है।

चाईबासा और हजारीबाग जिलों के इंसानी बस्तियों में तबाही मचा रहे बेलगाम हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक से 6 विशेष प्रशिक्षित ‘कुमकी’ (Kunki) हाथी बुलाए जा रहे हैं। ये हाथी अपने व्यवहार और गंध के जरिए हिंसक नर हाथियों को ‘प्रेमजाल’ में फंसाकर शांत करेंगे और उन्हें वापस जंगल ले जाएंगे।

‘कुमकी’ या ‘कुनकी’ फारसी शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘सहायक’। ये हाथी और उनके महावत विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, वयस्क नर हाथियों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ने से वे ‘मस्त’ (हिंसक) हो जाते हैं और झुंड से अलग होकर बस्तियों में हमला करते हैं।
रणनीति ये है कि कुमकी हाथी (खासकर हथिनियां) हिंसक हाथियों के पास जाकर उन्हें अपने व्यवहार से शांत करती हैं। इनके साथ विशेषज्ञों की एक टीम भी होगी जो जरूरत पड़ने पर हिंसक हाथी को ट्रैंक्युलाइज (बेहोश) भी कर सकेगी।
तमिलनाडु का ‘कालेम’ और कर्नाटक का ‘अभिमन्यु’ जैसे कुमकी हाथी कई हिंसक हाथियों को सफलतापूर्वक पकड़ने में मदद कर चुके हैं।
झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने बताया कर्नाटक सरकार ने छह कुमकी हाथियों को भेजने की सहमति दे दी है। प्रशिक्षित महावतों और विशेषज्ञों की टीम के साथ ये हाथी जल्द ही चाईबासा और हजारीबाग में मोर्चा संभालेंगे।
बता दें कि राज्य में हाथियों का उत्पात इस कदर बढ़ गया है कि पिछले एक महीने में 25 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। चाईबासा में अकेले एक हाथी ने यहां 15 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।
जबकि हजारीबाग में पांच हाथियों के एक झुंड ने एक ही रात में 7 लोगों की जान ले ली।


