
Ranchi: बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट, देवघर द्वारा परित्राण मेडिकल ट्रस्ट से मेडिकल कॉलेज खरीदे जाने के विरोध में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली सांसद निशिकांत दुबे की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई।

मामले में प्रतिवादी शिवदत्त शर्मा द्वारा निशिकांत दुबे के वकील प्रशांत पल्लव पर लगाए गए आरोप को लेकर दाखिल हस्तक्षेप याचिका (आईए) पर भी सुनवाई हुई। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने आईए को खारिज करते हुए शिवदत्त शर्मा पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना की यह राशि झारखंड लीगल सर्विस अथॉरिटी (झालसा) में दो सप्ताह में जमा करने का निर्देश दिया है।

बता दें कि शिवदत्त शर्मा ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर कहा था कि वर्ष 2012-13 में निशिकांत दुबे के वकील प्रशांत पल्लव उनके एक केस में पैरवीकार थे इसलिए वे इस मामले में उनके खिलाफ केस नहीं लड़ सकते हैं। जिस पर एमपी निशिकांत दुबे के वकील प्रशांत पल्लव की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह मामला काफी पुराना है और वर्तमान केस और उस समय शिवदत्त शर्मा के लिए पैरवी किए गए केस की प्रकृति अलग-अलग है। वर्तमान केस क्रिमिनल केस है। शिवदत्त शर्मा ने यह आईए इस क्रिमिनल केस मे देरी करने के उद्देश्य किया है ताकि इसका निर्णय न आ सके।
हाई कोर्ट की एकल पीठ ने प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद शिवदत्त शर्मा की आईए को खारिज करते हुए परित्राण मेडिकल ट्रस्ट से मेडिकल कॉलेज खरीदे जाने के विवाद मामले में सुनवाई जारी रखी है।
वहीं, कोर्ट ने सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक 9 दिसंबर तक बरकरार रखी है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रशांत पल्लव एवं पार्थ जालान ने पक्ष रखा।
पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता देवघर परित्राण मेडिकल ट्रस्ट के सचिव शिवदत्त शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
क्या है मामला
परित्राण मेडिकल लोन ट्रस्ट के सचिव शिवदत्त शर्मा की ओर से एफआईआर दर्ज कर कहा गया है कि बाबा बैजनाथ मेडिकल ट्रस्ट, देवघर जिसमें सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी ट्रस्टी भी है उसके द्वारा जालसाजी कर परित्राण मेडिकल ट्रस्ट से मेडिकल कॉलेज खरीदा गया है। मामले को लेकर देवघर के जसीडीह थाना में कांड संख्या 96/2024 दर्ज किया गया है। निशिकांत दुबे की ओर से याचिका दाखिल कर इससे संबंधित एफआईआर को निरस्त करने का आग्रह किया गया है।


