
Giridih/Jamui: जमुई एसएसबी की टीम ने गिरिडीह-जमुई सीमावर्ती क्षेत्र से दो संदिग्ध को दबोचा है। दबोचे गए दोनों संदिग्ध नक्सली बताए जा रहे हैं। हिरासत में लिए गए संदिग्धों में एक गिरिडीह के भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के गुनियाथर गांव निवासी जोसेफ मंराडी तो दुसरा उसका साथी है। दोनों आरोपी को पकड़ जमुई के सोेनो थाना की पुलिस पूछताछ कर रही है।

पुलिस सूत्रों की मानें तो जमुई एसएसबी की टीम ने शनिवार की सुबह दोनों को सोनो थाना इलाके के चरकापत्थर से दबोचा गया है। हालांकि दोनों में से किसी के पास कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। लेकिन भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के गुनियाथर गांव का रहने वाला जोसेफ मंराडी के पास से एक नक्सली पत्र मिलने की बात सामने आई है।

पुलिस सूत्रों की मानें तो जोसेफ मंराडी के पास से बरामद नक्सली पत्र जमुई के हार्डकोर नक्सली प्रवेश दा के नाम से बताया जा रहा है। यही नही जोसेफ मंराडी को प्रवेश दा के नाम से दिया गया पत्र उसे प्रवेश दा को पहुंचाने के लिए बोला गया था। इसी पत्र को लेकर वह जा भी रहा था, इसी दौरान जब जोसेफ अपने साथी के साथ गुनियाथर से होते हुए चरकापत्थर के पास पहुंचा, तो जमुई एसएसबी ने दोनों को संदेह के आधार पर दबोचा। तलाशी के क्रम में ही जोसेफ के पास से प्रवेश दा के नाम का पत्र बरामद हुआ। इसके बाद दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है।
वहीं, एसएसबी के हत्थे चढ़ा जोसेफ साल 2007-2008 में पुलिस और नक्सली मुठभेड़ में शामिल होने के आरोप में जेल जाने की बात सामने आई है। क्योंकि जोसेफ का संपर्क गिरिडीह-जमुई के मारे गए जोनल कमांडर चिराग दा के दस्ते से था। चिराग दा के दस्ते के साथ ही साल 2007-2008 में पुलिस और नक्सली मुठभेड़ हुआ था। इसी मुठभेड़ के बाद कुछ दिनों बाद जोसेफ को दोनों जिलों की पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजा था। लेकिन दावा यह भी है कि जेल से जमानत पर छूटने के बाद जोसेफ का कोई नक्सली कनेक्शन नहीं रह गया था।
वहीं इतने सालों बाद एक बार फिर जमुई के हार्डकोर नक्सली प्रवेश दा के नाम लेटर ले जाने के आरोप में जोसेफ को शनिवार की अहले सुबह जमुई पुलिस द्वारा दबोचा गया।


