
Deoghar: आइ एम ए एवं झासा, झारखंड ने लंबित मांगो को गंभीरता से विचार कर पूरा करने की मांग एक बार फिर झारखंड के मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है। जिसको लेकर सोमवार को आइ एम ए एवं झासा ,झारखंड ने देवघर डीसी के द्वारा सीएम के नाम मांगो का ज्ञापन सौंपा।
आइ एम ए एवं झासा ,झारखंड ने बार-बार लंबित मांगों को सरकार के समक्ष रखा है, जो निम्नांकित है:-

1) क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में आवश्यक संशोधन- हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश की तर्ज पर 50 बेड तक के अस्पतालों को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से मुक्त रखा जाए ताकि सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी एवं सेकेंडरी लेवल के अस्पतालों का अस्तित्व बना रहे साथ ही गरीब एवं जरूरतमंद आम जनता को सस्ते दर पर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया होते रहे।

2) मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना- ज्ञात हो कि वर्तमान में भारतवर्ष के 23 राज्यों में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है। जिन राज्यों में यह लागू है ,वहां मरीजों का रेफरल कम है और परिणाम स्वरूप मृत्यु दर कम है। साथ ही चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मारपीट की घटना एवं अस्पतालों में तोड़फोड़ की घटना को कम किया जा सकेगा।
3) बायोमैट्रिक अटेंडेंस- आपने अपनी सूझबूझ से पुलिस विभाग को इमरजेंसी सर्विसेस मानते हुए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम से मुक्त करने की घोषणा की है। चूंकि एमरजैंसी सर्विसेज की सूची में स्वास्थ्य सेवा सबसे पहले आता है, इसलिए चिकित्सकों को भी बायोमैट्रिक अटेंडेंस से मुक्त किया जाए।
4) जामताड़ा के विधायक इरफान अंसारी के द्वारा सिविल सर्जन जामताड़ा को घसीट कर लाने जैसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया है। इसे संज्ञान में लेते हुए आपके स्तर से उचित करवाई की जाए।
5) धनबाद के डॉक्टर दंपत्ति डॉ विकास हाजरा एवं डॉo प्रेमा हाजारा आग लगने से आकस्मिक मृत्यु हो गई। धनबाद के ही आशीर्वाद अपार्टमेंट में आग लगने से अकस्मात मृत्यु पर राज्य सरकार द्वारा प्रति व्यक्ति चार लाख की राशि दिए जाने की घोषणा की गई है। चिकित्सक दंपत्ति के परिजनों को भी राज्य सरकार की तरफ से या राशि मुहैया कराया जाए। रिम्स रांची के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सौरभ शर्मा कि ड्यूटी जाने के क्रम में सड़क दुर्घटना के कारण अकस्मात मृत्यु हो गई। उन्हें राज्य सरकार की तरफ से चार लाख की राशि दिया जाए साथ ही उनकी पत्नी डॉ० खुशबू, जो खुद चिकित्सक( निश्चेतक) है, उन्हें सरकारी नौकरी दिया जाए ।
6) फायर सेफ्टी के एन ओ सी के लिए निर्धारित शर्तों को सरल बनाया जाए ताकि सभी अस्पतालों में, जहां पर अंत: विभाग हो , फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम किया जा सके और स्वास्थ्य केंद्र ,जहां पर मरीज भर्ती नहीं लिए जाते, वैसे स्वास्थ्य केंद्र को इससे मुक्त रखा जाए।
कहा गया है कि विभाग एवं सरकार के आश्वासन के बाद भी अभी तक इसे लागू नहीं किया जा सका है, यह चिंता का विषय है और संगठन इसके प्रति आपका ध्यान आकर्षित करना चाहती है और जरूरी निर्णय लेने की मांग करती है।
05 फरवरी 2023 को हुई आई एम ए एवं झासा की संयुक्त मीटिंग में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयो के आधार पर आग्रह किया गया है कि अविलंब आईएमए एवं झासा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर 27 फरवरी से प्रस्तावित विधानसभा सत्र से इसे पारित कराने की कृपा की जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि विपक्ष में रहते हुए चिकित्सकों के इन दो महत्वपूर्ण मांगों के प्रति आपकी भूमिका सराहनीय रही है और आपने इसके लिए हर संभव प्रयास किया है। वर्तमान में आप की सरकार है। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य से जुड़े सभी आम जनों का आपके द्वारा इससे संबंधित महत्वपूर्ण ,ठोस एवं निर्णायक घोषणा की उम्मीद है। राज्य भर के सभी प्राइवेट एवं सरकारी डॉक्टरों ने आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है ।साथ ही विभाग एवं सरकार द्वारा चला चलाए जा रहे सभी महत्वपूर्ण योजनाओं में, विशेषकर आपातकालीन जैसे कोविड-19 के तीनों लहरों के वक्त,अपनी पूरी क्षमता, लगन और दृढ़ता से कार्य किया है। परंतु विभाग एवं सरकार के उदासीन रवैया से आहत सभी चिकित्सकगण अपनी मांगों को लेकर गंभीर हैं और अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
इन्हीं कारणों से आई एम ए एवं झासा ने संयुक्त रूप से यह ऐलान किया है कि इस विधानसभा सत्र के दौरान अगर इन मुद्दों को पारित नहीं किया जाता है, तो संगठन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को बाध्य होगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार एवं विभाग की होगी। टकराव एवं आंदोलन की स्थिति ना बने इसलिए संगठन आपसे जरूरी हस्तक्षेप की मांग करती है।


