
Deoghar: आज़ादी के अमृत महोत्सव के मौके पर देवघर में शर्मसार करने वाला काम हुआ है जब आज़ादी की पहली लड़ाई के तीन सपूतों में से अमानत अली के आदमकद मूर्ति को असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया गया। साथ ही उसको भंग कर गिरा दिया गया है। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी और आक्रोश देखा जा रहा है।

देवघर जिले के रोहिणी स्थित शहीद स्थल मे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के तीन जांबाज सिपाही सलामत अली अमानत अली और शेख हारुन के आदम कद मूर्तियों को देश के प्रति उनके बलिदान के सम्मान में लगाया गया था। पूर्व उपायुक्त अरुण कुमार सिंह के प्रयास से शहीद स्थल का सुंदरीकरण का कार्य संभव हो सका था.

स्थानीय इतिहासकार प्रो नंदन दुबे बताते है कि अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति में इन तीन जांबाज सिपाहियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पांचवी घुड़सवार फौज के एक अफसर एन आर लेस्ली को मार गिराया था और एक लंबी तहकीकात के बाद इन तीनों को हत्या के जुर्म में दोषी पाया गया था और इन्हें जो शहीद स्थल आज है वहीं पर आम के पेड़ में लटका कर फांसी की सजा दी गई थी।
अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के समय से यह क्षेत्र जागरूक रहा और इनका बलिदान देश के इतिहास के लिये अविस्मरणीय है। किसी भी दृष्टिकोण से किसी भी स्थिति में यह सही नहीं है जिन तत्वों ने इस काम को किया है वह देश को तोड़ना चाहते हैं देश में सांप्रदायिक सद्भाव को भड़काना चाहते हैं और इस कृत्य की जितनी भर्त्सना की जाय वो कम होगी ।
उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन राज्य प्रशासन और केंद्र शासन इतिहास की इस तरह की धरोहर को साथ जिसने भी अपमानित किया तोडा उसके साथ सख्ती से पेश आया जाए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाय और देवघर की सांस्कृतिक राजधानी में यहां के संस्कार को जिस किसी ने कलंकित करने का प्रयास किया है उसे किसी भी स्थिति में न छोड़ा जाए


