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ड्रोन अटैक से कैसे बचेगा भारत ?

भारतीय वायुसेना के जम्मू एयरबेस पर 27 जून को ड्रोन से किए गए हमले ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। ये हमला अपने किस्म की पहली ऐसी घटना है जिसमें ड्रोन के जरिए विस्फोटक भेजकर भारतीय सेना को निशाना बनाने का मंसूबा रचा गया।

रंजना मिश्रा

भारतीय वायुसेना के जम्मू एयरबेस पर 27 जून को ड्रोन से किए गए हमले ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। ये हमला अपने किस्म की पहली ऐसी घटना है जिसमें ड्रोन के जरिए विस्फोटक भेजकर भारतीय सेना को निशाना बनाने का मंसूबा रचा गया। जिस तरह लगातार भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन देखे जा रहे हैं, उससे यह अंदाजा लगाया जाना मुश्किल नहीं कि आने वाले दिनों में ड्रोन को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।

जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन अटैक और जम्मू मिलिट्री स्टेशन पर ड्रोन देखे जाने के बाद, एकबार फिर से देश में एंटी ड्रोन सिस्टम की मांग तेज हो गई है क्योंकि एंटी ड्रोन सिस्टम एकमात्र ऐसा सिस्टम है, जो दुश्मनों के ड्रोन को अपने आप डिटेक्ट कर पलक झपकते ही हवा में खत्म कर देता है। जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन पर हुआ ड्रोन अटैक किसी सैन्य ठिकाने पर हुआ पहला ड्रोन अटैक जरूर था, लेकिन आखिरी नहीं। इसीलिए चिंता लाजमी है कि क्या भारत के पास दुश्मन के ड्रोन अटैक को नाकाम करने के लिए कोई तकनीक है?

ड्रोन अक्सर रडार की नजरों से बच जाते हैं

दरअसल कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की वजह से ड्रोन अक्सर रडार की नजरों से बच जाते हैं, यही वजह है कि भारत के खिलाफ पाकिस्तान अब सीमा पार से ड्रोन वाली चाल चल रहा है। ड्रोन में विस्फोटक और आईईडी के जरिए वो एयरफोर्स स्टेशन और मिलिट्री स्टेशन को निशाना बना रहा है। यही कारण है कि अब एंटी ड्रोन सिस्टम की मांग और बढ़ गई है और इसे जल्द से जल्द भारत लाने की बात कही जा रही है। डील के तहत भारत को जल्द ही इजराइली एंटी ड्रोन सिस्टम मिल सकता है। नौसेना इसकी खरीद की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है और अब आने वाले समय में आर्मी और एयरफोर्स भी इसकी ओर कदम बढ़ा सकते हैं।

आतंकियों ने ड्रोन का इस्तेमाल इसलिए किया है क्योंकि इसे रडार की मदद से पकड़ना बेहद मुश्किल है। ये आकार में बहुत छोटे होते हैं, कई बार तो इनका आकार एक चिड़िया जितना होता है और रडार इतनी छोटी चीज को नहीं पहचान पाता। ड्रोन में कोई पायलट नहीं होता, इसे रिमोट से चलाया जाता है इसलिए पकड़े या मारे जाने का रिस्क नहीं रहता। ये कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है व बेहद सस्ता होता है, कोई भी इसे खरीद सकता है। दूसरे हमलों की तुलना में ये काफी किफायती होता है।

क्या है ड्रोन?

मानव रहित विमान ड्रोन कहलाता है, इसका असल इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जाता है। जैसे सेना अपनी सीमाओं पर चौबीसों घंटे और चारों ओर सैनिक तैनात नहीं कर सकती, ऐसी स्थिति में ड्रोन लगा दिए जाते हैं, जो उड़ते हुए सर्विलांस करते हैं, जैसे ही कोई संदिग्ध बात नजर आती है तो ड्रोन इसको डिटेक्ट करता है और ये खबर ड्रोन सेना तक पहुंचाता है, जिससे सेना या तो अलर्ट हो जाती है या फिर ड्रोन को निष्क्रिय कर दिया जाता है। ड्रोन अपने कैमरे से किसी की भी गतिविधियों की सूचना भेज सकता है, डाटा चुरा सकता है और जानमाल का नुकसान तक कर सकता है। यानी बम आदि से लैस होकर किसी को भी मार कर जा सकता है, इसलिए ये ड्रोन अटैक बहुत खतरनाक और बड़ी चिंता का विषय है।

डीआरडीओ ने ऐसी एंटी ड्रोन तकनीक विकसित की है

डीआरडीओ ने ऐसी एंटी ड्रोन तकनीक विकसित की है जिससे दुश्मनों का ड्रोन पलक झपकते ही जमीन पर आ जाएगा, इस सिस्टम को इंद्रजाल नाम दिया गया है। डीआरडीओ की ये वो एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी है जो लेजर के जरिए हवाई ऑब्जेक्ट को चूर-चूर करने में सक्षम है, इसे डीआरडीओ ने 18 महीने पहले विकसित किया है, इस तकनीक का नाम चैस है। ये दुश्मन के ड्रोन को तहस-नहस कर सकती है, इसे जमीन के साथ-साथ गाड़ियों पर भी लगाया जा सकता है। इस डिवाइस में 360 डिग्री तक रोटेट करने वाला एक रडार है जो 4 किलोमीटर की रेंज तक छोटे छोटे ड्रोन को डिटेक्ट कर सकता है। इसके अलावा इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्टर भी मौजूद है। ड्रोन को हवा में ही जाम करने के लिए जैमर भी इसमें लगे हैं, ये सारी चीजें सॉफ्ट किल का हिस्सा हैं।

पूरा सिस्टम कमांड पोस्ट के जरिए इंटीग्रेट होता है

जहां तक हार्ड किल यानी आतंकी ड्रोन को खत्म करने की बात है तो इसमें लेजर सिस्टम लगा है, ये पूरा सिस्टम कमांड पोस्ट के जरिए इंटीग्रेट होता है, ये 3 किलोमीटर की रेंज में दुश्मन के यूएवी को लॉक कर सकता है और ढाई किलो मीटर की रेंज में हार्ड किल व सॉफ्ट किल के जरिए ये पूरी तरह से यूएवी को ध्वस्त करने की काबिलियत रखता है। दरअसल ये तीन अलग-अलग तरीके से काम करता है, जिसमें लेजर के जरिए दुश्मन के यूएवी को लॉक करके तुरंत उसे गिराने की क्षमता इस एंटी ड्रोन तकनीक में है, दूसरा ये उसके सेंसर्स और सिग्नल्स को जाम कर देता है, तीसरा सभी सिग्नल्स को ब्लॉक करके ये यूएवी को दुश्मन से डिस्कनेक्ट कर सकता है, जिससे यूएवी को ऑपरेट करने वाले हैंडलर तक कोई जानकारी या कोई तस्वीर नहीं पहुंच पाएगी।

डीआरडीओ का एंटी ड्रोन सिस्टम

डीआरडीओ के एंटी ड्रोन सिस्टम का कई मौकों पर सफल परीक्षण हो चुका है, इसकी तैनाती 2020 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वीवीआईपी लोगों को सुरक्षा देने के लिए हुई थी। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम पहुंचे थे, उस समय भी इस सिस्टम को वहां लगाया गया था। इस साल गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भी इसकी सेवा ली गई थी। ड्रोन अटैक के खतरे को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से ये तकनीक बहुत ही कारगर एवं जरूरी है। जहां-जहां ड्रोन दिखे, वो क्षेत्र पाकिस्तानी सीमा से बेहद नजदीक हैं। अबतक पाकिस्तान आतंकी भेजता था, अब वह विस्फोटक ड्रोन भी भेजने लगा लेकिन सुरक्षा बलों को भी ये ताकीद कर दी गई है कि जो हाल आतंकियों का किया जाता है, वही हाल अब पाकिस्तानी ड्रोन का भी किया जाएगा।

(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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