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Jharkhand: तीन सालों में विधानसभा उपचुनाव हुए चार, सत्ता पक्ष जीता हर बार

Ranchi: झारखंड में वर्ष 2019 के बाद से अब तक चार उपचुनाव (by-election) हुए हैं। इन चारों उपचुनावों में सत्ता पक्ष यानी कांग्रेस-झामुमो गठबंधन (Congress-JMM alliance) का दबदबा बरकरार रहा है। चौथे उपचुनाव में चौथी बार जीत का सेहरा गठबंधन की उम्मीदवार नेहा शिल्पी तिर्की (Neha Shilpi Tirkey) के सिर बंधा है।

झारखंड विधानसभा की मांडर सीट पर हुए उपचुनाव की मतगणना रविवार को हुई। इसमें गठबंधन की उम्मीदवार नेहा शिल्पी तिर्की ने भाजपा की उम्मीदवार गंगोत्री कुजूर को 23517 मतों से हराया है। मतगणना में कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की को 95062 वोट मिले जबकि भाजपा की गंगोत्री कुजूर को 71545 मत हासिल हुए।

मांडर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी गंगोत्री कुजूर के लिए प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं ने जमकर प्रचार किया था। चाहे वह भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश हों या फिर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी। सबने चुनाव प्रचार में खूब पसीना बहाया था लेकिन वे भाजपा प्रत्याशी को जीत न दिला सके। यही नहीं आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो की मेहनत भी काम नहीं आयी। सत्ता पक्ष से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोर्चा संभाला था।

आदिवासी वोटरों पर भाजपा का घटता प्रभाव

वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जनजातीय समुदाय के लिए आरक्षित 28 विधानसभा सीटों में महज दो सीटों पर जीत मिली थी। उस समय भी यह बात सामने आई थी कि भाजपा से जनजातीय समुदाय का मोह भंग हो रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व को भी इस बात का एहसास हुआ और विधानसभा चुनाव परिणाम के दो महीने के बाद ही बाबूलाल मरांडी को पार्टी में शामिल कराया। उन्हें विधायक दल के नेता का पद भी दिया लेकिन दुमका उपचुनाव में बाबूलाल नहीं चले।

जनजातीय मतदाताओं का रुझान एक तरफ नहीं

मांडर विधानसभा उपचुनाव में भी बाबूलाल की नहीं चली। मांडर में लगभग पौने दो लाख जनजातीय मतदाता हैं। जाहिर है इन मतदाताओं का झुकाव जिधर होगा जीत उसी की होगी। चुनाव परिणाम आने के बाद यह साफ है कि जनजातीय मतदाताओं का रुझान एक तरफ नहीं रहा। इनका वोट बटा और अन्य के मतों को अपने पक्ष में कर बंधु ने कमल को खिलने से पहले ही कुम्हला दिया।

2020 में भी दो सीटों पर सत्ताधारी दल ने कब्जा बरकरार रखा

झारखंड में वर्ष 2019 के बाद से अब तक चार उपचुनाव हुए हैं। वर्ष 2020 में दो विधानसभा सीटों दुमका और बेरमो में उपचुनाव हुए। इन दोनों सीटों पर सत्ताधारी दल ने अपना कब्जा बरकरार रखा। वर्ष 2019 में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में महागठबंधन की सरकार का गठन हुआ।

हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में बरहेट और दुमका दो विधानसभा क्षेत्रों से जीत हासिल की थी। ऐसे में उन्हें एक सीट छोड़नी थी। उन्होंने बरहेट सीट अपने पास रखी और दुमका सीट से त्यागपत्र दे दिया। इसकी वजह से दुमका सीट खाली हो गई और वहां उपचुनाव हुआ। इस सीट पर झामुमो प्रत्याशी के तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन को उतारा गया। बसंत सोरेन ने चुनाव लड़ा। उन्हें 80,559 मत मिले जबकि भाजपा की डॉ लुईस मरांडी को 73,717 वोट मिले। इस तरह बसंत सोरेन दुमका से विधायक चुन लिये गये।

दूसरी ओर राजेंद्र प्रसाद सिंह के निधन की वजह से बेरमो विधानसभा सीट खाली हुई और इसकी वजह से वहां पर उपचुनाव हुआ। इस सीट पर सत्ताधारी दल ने कांग्रेस के राजेंद्र सिंह के बेटे जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह को प्रत्याशी बनाया। जयमंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह ने भाजपा के योगेश्वर महतो बाटुल को 14,225 से अधिक वोट से पराजित किया। कुमार जयमंगल को 94,022 वोट मिले जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी योगेश्वर महतो बाटुल ने 79,797 वोट हासिल किया। इस तरह सत्ताधारी दल ने इस सीट पर भी अपना कब्जा बरकरार रखा।

राज्य में तीसरा उपचुनाव मधुपुर में 2021 में मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के निधन से खाली हुई सीट पर हुआ। इस सीट पर उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बगैर विधायक बने ही दिवंगत हाजी हुसैन अंसारी के बेटे हफीजुल हसन को अपनी सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बना दिया। इसके बाद हफीजुल मधुपुर विधानसभा उपचुनाव के मैदान में उतरे। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार गंगा नारायण सिंह को तगड़ी शिकस्त दी थी।

मांडर में मिली जीत को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व विधायक तथा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की की बेहतरीन चुनावी रणनीति का नतीजा बताया जा रहा है। (Input-HS)

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