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Jharkhand CM कर रहे हैं निजी मामलों में सरकारी धन का दुरुपयोग, MP निशिकांत ने CAG से की जांच की मांग

रांची हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (Public interest litigation filed in Ranchi High Court) समेत चुनाव आयोग में चल रहे डिसक्वालिफिकेशन केस (disqualification case) की पैरवी के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकारी धन (government money) का  इस्तेमाल कर रहे हैं

Deoghar Airport का रन-वे बेहतर: DGCA

Deoghar/New Delhi: रांची हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (Public interest litigation filed in Ranchi High Court) समेत चुनाव आयोग में चल रहे डिसक्वालिफिकेशन केस (disqualification case) की पैरवी के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकारी धन (government money) का  इस्तेमाल कर रहे हैं. यह आरोप लगाया है गोड्डा लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने. डॉ दुबे ने इस बाबत देश के CAG गिरिश चंद्र मुर्मु को पत्र लिखकर जांच की मांग की है.

डॉ दुबे ने ट्वीट के जरिए जारी अपनी चिट्ठी में जिक्र किया है कि, राज्य के मुख्यमंत्री ने खुद और अपने सहयोगियों के खिलाफ चल रहे मामलों की पैरवी के लिए निजी वकील हायर न कर राज्य सरकार की तरफ से कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और पल्लवी लांगर जैसे महंगे वकीलों को बचाव के लिए खड़ा कर सरकारी खजाने से फीस की रकम अदा कराई जो, सरासर गलत है क्योंकि, मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे मामले उनके निजी हैं सरकारी नहीं।

करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल निजी मामलों की पैरवी में क्यों?

सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने अपनी चिट्ठी में PIL संख्या 4290/2021 का हवाला देते हुए लिखा है कि, यह मामला मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों के खिलाफ सेल कंपनियों को लेकर है. इन सेल कंपनियों का संचालन झारखंड सरकार नहीं करती. ऐसे में एडवोकेट जनरल ऑफ झारखंड गवर्मेंट और उनकी टीम आखिर किन परिस्थियों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके सहयोगियों का पक्ष कोर्ट में रख रहे हैं।

और राज्य के करदाताओं के पैसे को सेल कंपनियों के बचाव में खर्च किया जा रहा है. इतना ही नहीं पत्र के जरिए उन्होंने पूछा है कि, आखिर क्यों नहीं सेल कंपनियों के बचाव के लिए सरकारी पैसे का इस्तेमाल करने से पहले विधानसभा से अप्रुुवल लिया गया।

जिम्मेदार अधिकारियों की सैलरी और पेंशन से हो रिकवरी

सरकारी पैसे का निजी केस में इस्तेमाल को लेकर जांच की मांग करते हुए सांसद दुबे ने सेल कंपनियों के बचाव में अबतक खर्च की गई रकम की रिकवरी प्रधान सचिव कैबिनेट कोऑर्डिनेशन एंड विजिलेंस और डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की तनख्वाह और उनके रिटायरमेंट बेनिफिट से करने की भी मांग की है। आपको बता दें कि, सांसद ने सीएजी को लिखी अपनी चिट्ठी में ECI में दायर डिसक्वालिफिकेशन और अवैध माइनिंग आवंटन मामले का भी जिक्र करते हुए तमाम आरोप लगाए हैं.

बहरहाल, सेल कंपनियों और अवैध माइनिंग लीज मामले में बैकफुट पर चल रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब सांसद की इस गुगली का क्या जवाब देते हैं यह देखने वाली बात होगी लेकिन, इतना तो तय है कि, निजी मामलों में सरकारी धन के इस्तेमाल का मुुद्दा उठाकर गोड्डा सांसद ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।

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