
Deoghar: बेतहाशा बढ़ते आपराधिक वारदातों पर लगाम कसने के मकसद से देवघर पुलिस ने चार वर्ष पूर्व अपने जिस भरोसेमंद सिपाही को शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर तैनात किया था. वह अब खुद ही बीमारी की चपेट में आ चुका है. जी हां, देवघर पुलिस जिन अदृश्य तीसरी नज़र को शहर की निगरानी के लिए तैनात किया था वह मोतियाबिंद का शिकार हो चुका है, या यूं कहें कि, साल 2017 से लगातार टकटकी लगाए बाबानगरी के 36 स्थानों पर निगहबानी करने वाले CCTV कैमरे अब बेकार हो चले हैं।

आलम यह है कि, देवघर पुलिस के कंट्रोल रूम का पैनल भी बेकार होने के कगार पर है। हालांकि, इसे दुरुस्त करने के मकसद से गृह विभाग को पत्र लिखकर ₹5 लाख की मांग भी की गई थी ताकि, बीमारी की शुरुआत में ही उसे जड़ से समाप्त कर दिया जाए बावज़ूद इसके सरकार और पुलिस महकमे के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

क्राइम कंट्रोल के लिये देवघर शहर में लगाये गये सभी CCTV कैमरे चार साल से बंद पड़े हैं। कई जगह से तो सीसीटीवी कैमरे भी गायब होने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक करीब छह साल पूर्व सांसद मद से पूरे शहर में 70 सीसीटीवी कैमरे लगाये गये थे, जो करीब चार साल से बंद पड़ा है।
मेंटेनेंस के अभाव में बंद
सभी CCTV कैमरे मेंटेनेंस के अभाव में बंद पड़ गये। पहले सीसीटीवी कैमरे के मैंटेनेंस के लिये एक कंपनी लगी हुई थी, किंतु एक साल तक बंद रहने के बाद उसे भुगतान लेने में ही कठिनाई होने लगी। इसके बाद ही उस कंपनी ने अपना हाथ खींच लिया, तभी से पूरा सिस्टम सीसीआर में बैठ गया।
जब सभी कैमरे शहर में चल रहे थे, उस वक्त सीसीआर से कंट्रोल होता था। शहर के प्रमुख प्रवेश व निकास मार्ग समेत विभिन्न चौक-चौराहों पर पुलिस बैठे-बैठे निगरानी रखती थी। उक्त सीसीटीवी कैमरे चलता रहता तो पुलिस को लूट, छिनतई, गोली कांडों के खुलासे में सहूलियत होता। किंतु इस तरफ पुलिस, प्रशासन सहित यहां के जनप्रतिनिधियों का कोई ध्यान ही नहीं है।

CCTV कैमरे से हुआ था राजकिशोर हत्याकांड का खुलासा
पुराना कुंडा थाना के पीछे बिहार अंतर्गत खगड़िया निवासी राजकिशोर की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी और हत्यारे स्कॉरपियो से भागे थे। इस मामले के खुलासे में पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की मदद ली थी। सीसीटीवी कैमरे से अपराधियों व स्कॉरपियो के नंबर की जानकारी पुलिस को मिली थी। इसके बाद ही देवघर पुलिस की छापेमारी टीम ने स्कॉरपियो खगड़िया से जब्त कर लाया था व अपराधियों को दबोचने के लिये मधेपुरा में छापेमारी की थी।
प्राइवेट कंपनी द्वारा लगाया 36 कैमरा भी नहीं हुआ चालू
फरवरी 2018 में एक प्राइवेट कंपनी द्वारा शहर के चौक-चौराहों पर 36 सीसीटीवी कैमरा लगाने का काम शुरु हुआ था। उक्त एक प्राइवेट कंपनी द्वारा टावर चौक सहित अस्पताल गेट, राय एंड कंपनी मोड़, प्राइवेट बस स्टैंड के समीप, बाजला चौक, कुंडा मोड़, सत्संग चौक, रांगा मोड़, बैजनाथपुर मोड़ के अलावे अन्य चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे का टावर खड़ा कर कैमरे भी लगा दिया गया था।
ट्रायल के तौर पर कैमरा चालू भी हुआ, किंतु निगम के टैक्स के पेंच में फंसकर स्थायी रुप से उसके चालू होने में बाधा लग गया। उक्त टावर पर कंपनी का विज्ञापन बोर्ड रहता और कंपनी ही उसमें लगे सीसीटीवी कैमरे का मेंटेनेंस कराती।
गृह विभाग से मांगा था पांच लाख रुपये
वर्ष 2018 में तत्कालीन डीसी राहुल कुमार सिन्हा ने सीसीटीवी के रखरखाव के लिये गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर पांच लाख रुपये का आवंटन मांगा था। लेकिन यह आज तक नहीं मिला है.
बहरहाल, बाबानगरी में जिस तरह से अपराध में इज़ाफ़ा दर्ज किया जा रहा है उसे देखते हुए अगर तीसरी नज़र की बीमारी को जल्द ही दुरुस्त नहीं किया गया तो, बहुत मुमकिन है कि, बेलगाम बदमाशों के तांडव को रोक पाना और उन्हें सलाखों कर पीछे पहुंचना मुश्किल साबित हो सकता है क्योंकि, अपराध के अनुसंधान में तीसरी नज़र का योगदान बेहद अहम माना जाता है।


