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The Inside Story: ₹6 करोड़ 9 लाख 14 हज़ार 5 सौ की “सियासी मंजूरी” हेमंत सरकार की किरकिरी के लिए काफी

हुज़ूर की चापलूसी में चिट्ठी जारी करने वाले नौकरशाह शायद यह भूल गए कि, उनकी एक गलती ही हेमंत सरकार की किरकिरी के लिए काफी रहेगी।

Deoghar: ऐसी किसी योजना या कार्य के विरुद्ध राशि व्यय की जा रही है जिसे दूसरे स्रोत से राशि मिल रही है या मिलने जा रही है तो निकासी रोककर इसके निराकरण हेतु सूचना सम्बंधित विभाग को देंगे।

यह मजमून है पथ निर्माण विभाग की तरफ से जारी उस पत्र का, जिसमें देवघर एयरपोर्ट तक जाने के लिए राज्य सरकार की नज़र में एप्रोच रोड का निर्माण होना है। लेकिन, विभाग ने जो चिट्ठी जारी की है उसके पैरा 6 में जिन शब्दों का उल्लेख किया गया है वह हेमंत सरकार की नीयत पर ही बड़ा सवाल खड़ा करता है। सवाल इसलिए भी क्योंकि, गोड्डा सांसद ने जब एप्रोच सड़क के निर्माण से लेकर उद्घाटन तक की कवायद पूरी कर दी फिर उसके बाद पत्र जारी करने के पीछे की क्या कहानी है?

तो अब जरा विभाग की तरफ से जारी चिट्ठी के पैरा 6 में लिखे मजमून को गौर से पढ़िए और समझिए कि, कैसे राज्य सरकार या उनके विभाग के अधिकारी जनता को मूर्ख बना रहे हैं। पत्र में साफ लिखा है कि, अगर किसी अन्य स्रोत से सम्बंधित सड़क पर व्यय हुआ या हो रहा है तो सरकार द्वारा जारी आवंटन की निकासी नहीं होगी, यानी, सरकार का पैसा सरकार के पास और जनता के बीच वाह-वाही। लेकिन, ये जो पब्लिक है वो सब जानती है… अंदर क्या है बाहर क्या है सब पहचानती है।

चिट्ठी का पैरा 6

इतना ही नहीं जरा चिट्ठी पर गौर कीजिए तो 22 सितम्बर को जारी चिट्ठी पर हस्ताक्षर 21 सितम्बर के हैं और जिला प्रशासन को ये प्राप्त होती है 28 सितम्बर को। लोकतंत्र में पक्ष-विपक्ष और विचारधारा का बड़ा अहम स्थान होता है और होना भी चाहिए। लेकिन, इसकी आड़ में जनता के हितों से खिलवाड़ भी जायज़ नहीं।

बहरहाल, देवघर एयरपोर्ट के लिए एप्रोच रोड के उद्घाटन को लेकर डॉ निशिकांत दुबे की कोशिशों के नतीजे का गवाह आज न सिर्फ संताल परगना बना बल्कि, इसकी गूंज राज्य के सत्ताधीश तक भी पहुंची और आनन-फानन में उसी सड़क के निर्माण को लेकर पत्र जारी कर दिया गया। लेकिन, हुज़ूर की चापलूसी में चिट्ठी जारी करने वाले नौकरशाह शायद यह भूल गए कि, उनकी एक गलती ही हेमंत सरकार की किरकिरी के लिए काफी रहेगी।

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