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बाबा धाम में इस वर्ष भी नहीं लगेगा श्रावणी मेला, तीर्थ पुरोहित और व्यवसायी निराश

बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी में लगातार दूसरे वर्ष भी श्रावणी मेला नहीं लगेगा। DC मंजूनाथ भजंत्री इस बाबत बताया कि यात्रियों को देवघर आने की अनुमति नहीं है, क्योंकि लगातार कोरोना का मामला बढ़ रहा है। यात्रियों का बाबा धाम में प्रवेश को रोकने के लिए पांच स्थानों चेकपोस्ट लगाया जा रहा है।

Deoghar: बाबा बैद्यनाथ की पावन नगरी में लगातार दूसरे वर्ष भी श्रावणी मेला नहीं लगेगा। DC मंजूनाथ भजंत्री इस बाबत बताया कि यात्रियों को देवघर आने की अनुमति नहीं है, क्योंकि लगातार कोरोना का मामला बढ़ रहा है। यात्रियों का बाबा धाम में प्रवेश को रोकने के लिए पांच स्थानों चेकपोस्ट लगाया जा रहा है।

DC मंजूनाथ भजंत्री ने बताया कि हाल फिलहाल के दिनों में देवघर में कोरोना के मामलों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। ऐसे में बाहर से आने वाले यात्रियों के जमावड़े को रोका जाएगा। बाहर से आने वाले यात्रियों को देवघर आने से रोकने के लिए पांच जगहों पर चेक पोस्ट बनाया जाएगा, जिसके तहत दर्दमारा, अंधरीगादर, दुम्मा, जमुई बॉर्डर और जयपुर मोड़ के पास चेक पोस्ट लगाकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को देवघर आने से रोका जाएगा और उन्हें वहीं से वापस भेज दिया जाएगा। उन्होंने इस बाबत 1000 की संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल लगाए जाने की भी जानकारी दी है।

उल्लेखनीय है कि श्रावणी मेला बैद्यनाथ धाम-बासुकीनाथ श्राइन बोर्ड के नियंत्रण में है, जिसके पदेन अध्यक्ष मुख्यमंत्री स्वयं हैं । विश्व के सबसे लंबे मेले के रूप में विख्यात श्रावणी मेले की कोई तैयारियाँ संचालित न होने से यह साफ हो गया है कि अब श्रावणी मेले का आयोजन इस वर्ष भी होना सम्भव नही है। इससे व्यवसायी, तीर्थ पुरोहित सहित स्थानीय लोगों में तो गहरी निराशा है ही बाबा बैद्यनाथ के भक्तों में भी गहरी निराशा है जो हर हाल में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के अभिलाषी हैं।

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला ना सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है अपितु इन दिनों देवघर की आर्थिक गतिविधियां चरम पर होती है, जिससे ना सिर्फ स्थानीय लोग लाभान्वित होते हैं, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के लिए भी व्यवसाय का बड़ा केंद्र बन जाता है।अनुमान के मुताबिक श्रावणी मेले सिर्फ देवघर में ही तकरीबन दो अरब से ज्यादा का व्यवसाय होता है।

युवा व्यवसायी चन्दन शाह, रवि पांडे बताते हैं कि सरकार को सीमित संख्या में तीर्थ यात्रियों को श्रावणी मेला में आने की इजाज़त दिया जाना चाहिए ताकि हमारे जीवन यापन का आधार बचा रह सके अन्यथा कोरोना से तो कम भुखमरी से व्यवसायी ज्यादा मरेंगे।

तीर्थ पुरोहित समाज के कनक कांति झा, बाबा झा आदि कहते हैं कि बाबा मंदिर को आम लोगों के लिए ना खोला जाना सरकार की तानाशाही है क्योंकि लगभग सारी गतिविधियाँ चल ही रही है ऐसे में सिर्फ बाबा मंदिर में यात्रियों के आने से कोरोना फैल जाएगा यह षड्यंत्र के सिवा और कुछ नहीं।

राजनीतिक तौर पर भी सरकार के निर्णय के विरुद्ध प्रतिरोध तेज़ है। स्थानीय साँसद निशिकांत दुबे, भाजपा विधायक सह जिला अध्यक्ष नारायण दास अविलम्ब मन्दिर आम लोगों के लिए खोले जाने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर उनका कहना है कि सरकार जानबूझकर अरबों के आर्थिक व्यवसाय को ठप कर देवघर की जनता को भुखमरी के कगार पर पहुंचाना चाहती है, क्योंकि स्थानीय लोग सरकार समर्थित दल के परम्परागत वोटर नहीं हैं।

युवा नेता अभिषेक कुमार मिक्कू बताते हैं कि श्रावणी मेला में प्रतिबर्ष 40-से 50 लाख लोग जलाभिषेक को बाबा धाम आते हैं ऐसे में अगर एक यात्री एक हज़ार भी खर्चता है तो यह अरबों की राशि होती है। इस कारण राज्य के अतिरिक्त अन्य राज्यों से हज़ारों-हज़ार व्यवसायी को रोजगार मिलता है किंतु सरकार इस दिशा में गम्भीर नहीं है जो अत्यंत दुःखद है।

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