
पटना/जामताड़ा: कोरोनावायरस के बाद अब ब्लैक फंगस भी कहर मचाने की तैयारी में है। बिहार में ब्लैक फंगस बीमारी से एक की मौत हो गयी है। तो वहीं, झारखण्ड में ब्लैक फंगस का एक और मरीज मिला है।
बिहार में ब्लैक फंगस से पहली मौत

बिहार में बेतिया के जीएमसीएच के पैथोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ यूएस पाठक की मौत हो गई है। इलाज के लिए उन्हें पटना के रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। सोमवार की देर शाम इलाज के क्रम में उनकी मौत हो गई। बताया गया कि बीते 14 अप्रैल को वह बेतिया मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान कोरोना के शिकार हुए थे। कोरोना को उन्होंने मात दे दिया और उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई। हालांकि इसके बाद उनमें ब्लैक फंगस (Black Fungus) के लक्षण दिखने पर पटना के रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां उनका दाहिना आंख निकाल देने के बाद भी उनके शरीर में कई अंगों ने अपना काम करना बंद कर दिया और सोमवार की देर शाम उनकी मौत हो गई।
झारखण्ड में ब्लैक फंगस का मिला एक और मरीज, हो चुकी है चार मौत

वहीं, झारखंड के संताल परगना में भी ब्लैक फंगस ने अपनी दस्तक दे दी है। जामताड़ा जिले के एक 60 वर्षीय बुजुर्ग इस फंगस से संक्रमित हो गये हैं। सोमवार को उक्त बुजुर्ग को इलाज के लिए रांची के रिम्स रेफर किया गया है। ब्लैक फंगस से अब तक झारखण्ड राज्य में चार लोगों की मौत हो चुकी है। झारखण्ड राज्य में ब्लैक फंगस के अब तक लगभग 10 से अधिक मरीज मिले हैं। इनमें कुछ मरीजों का इलाज मेडिका और रिम्स में चल रहा है।
हेल्थ विशेषज्ञों के अनुसार ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों मेन साइनस की परेशानी, नाक का बंद हो जाना, आधा चेहरा सुन्न पड़ जाना, आंखों में सूजन, धुंधलापन, सीने में दर्द उठना, सांस लेने में समस्या होना एवं बुखार होना म्यूकरमाइकोसिस मुख्य लक्षण हैं। यह अधिकतर कोरोना पीड़ित डायबिटीज के मरीजों में होता है।


