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बिहार में हर साल 12.5 लाख होते हैं गर्भपात

आई पास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन के सौजन्य से स्थानीय संस्था सामाजिक विकास संस्थान के द्वारा स्वास्थ्य, बच्चा, महिलाओं एवं किशोरियों के साथ कार्य कर रही संस्थाओं के साथ एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

पटना: आई पास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन के सौजन्य से स्थानीय संस्था सामाजिक विकास संस्थान के द्वारा स्वास्थ्य, बच्चा, महिलाओं एवं किशोरियों के साथ कार्य कर रही संस्थाओं के साथ एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

आईपास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन के राजीव ने उपस्थित प्रतिभागियों को एमटीपी एक्ट कानून पर जानकारी दी । राजीव ने बताया राज्य में हर वर्ष 12.5 लाख गर्भपात के केस सामने आते हैं और इनमे मात्र आठ प्रतिशत सरकारी संस्थानों में कराये जाते हैं। उन्होंने बताया 24 सप्ताह तक गर्भ समापन कराना वैध है लेकिन 12 सप्ताह के अंदर एक प्रशिक्षित डॉक्टर एवं 12 सप्ताह से ऊपर तथा 20 सप्ताह के अंदर तक में दो प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में होनी चाहिये।

इस दौरान परिस्थिति क्या होनी चाहिए पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही माहवारी के समय साफ सफाई के संबंध में भी जानकारी दी गयी । उन्होंने सभी संस्था के प्रतिनिधि से आग्रह किया की आप अपने कार्य क्षेत्र में भी इस विषय पर चर्चा कीजिये ताकि असुरक्षित गर्भपात से होने बाली महिलाओं की मृत्यु एवं मातृ मृत्यु दर कम हो सके। देश में मातृ मृत्यु दर का आठ प्रतिशत आंकड़ा असुरक्षित गर्भपात के कारण दर्ज किया जाता है।

आई पास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन के वरिष्ठ कार्यक्रम पदाधिकारी खुर्शीद एकराम अंसारी ने कहा कि अभी तक पटना जिले में 280 आशा, 91 नर्स, 146 आंगनबाड़ी सेविका का उन्मुखीकरण किया गया है । साथ ही 15 एनजीओ को सांझा प्रयास नेटवर्क से जोड़ा गया। कार्यक्रम के अंत में सांझा प्रयास नेटवर्क के अन्तर्गत हस्ताक्षर अभियान कराया गया। इस अभियान का स्लोगन था हम महिलाओं के प्रजनन, स्वास्थ्य एवं सुरक्षित गर्भपात संबंधित अधिकारों का समर्थन करते हैं।

हस्ताक्षर अभियान की हुई शुरुआत

कार्यशाला में स्लोगन के पत्र पर शामिल प्रतिभागियों ने हस्ताक्षर कर हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। महिलाओं के प्रजनन स्वस्थ्य, किशोरी स्वस्थ्य एवं सुरक्षित गर्भपात की महत्ता को सारे प्रतिभागियों ने स्वीकारा और समुदाय को जागरूक करने का संकल्प लिया।

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