
Guwahati : असम विधानसभा चुनाव (Assam Legislative Assembly Elections) के लिए प्रचार में जुटे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand Chief Minister Hemant Soren) ने सोशल मीडिया के जरिए वहां की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें और उनकी पार्टी के नेताओं को चुनाव प्रचार से रोकने की कोशिश की जा रही है और इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) इस बार असम में 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी के समर्थन में हेमंत सोरेन पिछले आठ दिनों से असम में कैंप कर रहे हैं और लगातार जनसभाएं तथा संपर्क अभियान चला रहे हैं। सोमवार को अपने तीन अलग-अलग पोस्ट में सोरेन ने आरोप लगाया कि चाबुआ और रोंगोनदी विधानसभा क्षेत्रों में उन्हें प्रचार करने और लोगों से मिलने से रोका गया।
उन्होंने कहा कि “प्रधानमंत्री के कार्यक्रम” का हवाला देकर उनके कार्यक्रमों को इजाजत नहीं दी गई, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। सोरेन ने कहा कि सत्ता के प्रभाव में लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, ताकि विपक्ष की आवाज जनता तक न पहुंचे। उन्होंने इसे “षड्यंत्र” करार देते हुए कहा कि उनका संघर्ष न तो झुकेगा और न ही रुकेगा।
सोरेन ने कुछ सभाओं को मोबाइल के जरिए संबोधित किया। उन्होंने असम के आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा न मिलने को “राष्ट्रीय अन्याय” बताया और चाय बागान के श्रमिकों के लिए 500 रुपये न्यूनतम मजदूरी की मांग को दोहराया।
सोरेन ने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई है। अपने संदेश में उन्होंने आदिवासी, दलित, पिछड़े और चाय बागान के श्रमिक समुदायों से एकजुट होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वर्षों से शोषण झेल रहे ये वर्ग अब जाग चुके हैं और अपने अधिकार लेकर रहेंगे। सोरेन ने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन पहले विधायक कल्पना सोरेन को भी सभा करने से रोका गया था।
उन्होंने कहा कि इस तरह की बाधाओं के बावजूद उनका अभियान जारी रहेगा और 9 अप्रैल को मतदाता “तीर-धनुष” चुनाव चिह्न के पक्ष में मतदान कर जवाब देंगे। (IANS)


