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सोमवार का दिन काशी नगरी के लिए ऐतिहासिक, विश्वनाथ धाम का प्रधानमंत्री करेंगे लोकार्पण

काशी पुराधिपति की नगरी में सोमवार का दिन ऐतिहासिक होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 54 हजार वर्गमीटर में फैले श्री काशी विश्वनाथ धाम (कॉरिडोर) को शुभ मुहूर्त में देश के शिवभक्तों के लिए लोकार्पित करेंगे।

Varanasi: काशी पुराधिपति की नगरी में सोमवार का दिन ऐतिहासिक होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 54 हजार वर्गमीटर में फैले श्री काशी विश्वनाथ धाम (कॉरिडोर) को शुभ मुहूर्त में देश के शिवभक्तों के लिए लोकार्पित करेंगे। इस अद्भुत क्षण की साक्षी देश के तीन हजार संतों के साथ काशी और पूरी दुनिया होगी। लगभग साढ़े तीन सौ साल बाद ऐसा अदभुत और स्वर्णिम पल के लिए लोगों में लगातार उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

रवियोग के अद्भुत संयोग में पूरे विधि विधान से देश की सभी पवित्र नदियों के जल में गंगाजल मिलाकर प्रधानमंत्री काशीपुराधिपति का अभिषेक करेंगे। मुख्य यजमान बन प्रधानमंत्री षोड्षोपचार विधि से भगवान विश्वेश्वर के पावन ज्योर्तिलिंग का पूजा अनुष्ठान करेंगे। मंदिर के प्रमुख अर्चक मंदिर के गर्भगृह के बाहर बने चौक पर प्रधानमंत्री को शिवसंकल्प सूक्त का संकल्प दिलायेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री काशीपुराधिपति से राष्ट्र की उन्नति, विश्व कल्याण की प्रार्थना कर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम देश को समर्पित कर देंगे। सोमनाथ धाम (गुजरात) के लोकार्पण के बाद 66वर्ष बीत गये तब जाकर ये मौका आया है। धाम के लोकार्पण केे बाद मंदिर चौक में प्रधानमंत्री संत-महात्माओं व गणमान्य नागरिकों को संबोधित करेंगे। इस दौरान श्री श्री रविशंकर, बाबा रामदेव, साध्वी ऋतंभरा सहित सैकड़ों संत-महात्माओं की विशेष मौजूदगी होगी।

बताते चले कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 08 मार्च 2019 में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का शिलान्यास कर बाबा के भव्यतम धाम को सपना देखा था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड समय दो वर्ष 9 माह नौ दिन में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कड़ी मेहनत और दिशा निर्देशन, उनके सहयोगी मंत्रियों की निगरानी, जिला प्रशासन के कठिन परिश्रम से प्रधानमंत्री का सपना मूर्त रूप ले पाया है।

इसके निर्माण के लिए 320 भवनों को क्रय किया गया, जिसमें 498 करोड़ रुपये लागत आयी थी। परियोजना के पहले चरण में धाम को भव्यतम स्वरूप देने में 445 करोड़ रुपये की लागत आई। प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण की प्रक्रिया बहुत ही जटिल थी।

तंग सकरी गलियां, 315 भवनों का अधिग्रहण, करीब 700 परिवारों, छोटे-बड़े दुकानदारों का विस्थापन, काशी खण्डोक्त के अनुसार वर्षो से पूजित मन्दिरो का संरक्षण और इस परियोजना का राजनीतिक विरोध जैसी तमाम बाधाएं पीएम मोदी के दृढ़ संकल्प के आगे भरभरा कर गिर गई।

352 वर्ष पूर्व रानी अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मन्दिर का जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर पर सोने की परत लगवा कर बाबा विश्वनाथ दरबार को भव्य स्वरूप दिया था। लेकिन बाबा विश्वनाथ को संकरी और बदबूदार गलियों के बीच से निकाल कर उसे विस्तारित और ऐतिहासिक भव्यतम स्वरूप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया।

अब काशी धाम के लोकार्पण के बाद माना जा रहा है कि धार्मिक पर्यटन को पंख लग जायेगा। पर्यटन विभाग के अफसरों के अनुसार लोकार्पण के पहले ही काशी में आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

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