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झारखंड पुलिस पर भारी पड़े बिहार पुलिस के काबिल अफसर, अवैध असलहों के फ़र्ज़ी लाइसेंस बनाने वाले गिरोह का पर्दाफ़ाश

कहने को तो देवघर से लगने वाली बिहार की सीमा महज़ 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में है लेकिन, दोनो राज्यों की पुलिस और उनकी कार्यशैली में अब भी ज़मीन आसमान का फर्क नज़र आता है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि, यह साबित कर दिखाया है पड़ोसी राज्य में सीमावर्ती जिले के पुलिस कप्तान ने।

Deoghar/Banka: कहने को तो देवघर से लगने वाली बिहार की सीमा महज़ 15 से 20 किलोमीटर के दायरे में है लेकिन, दोनो राज्यों की पुलिस और उनकी कार्यशैली में अब भी ज़मीन आसमान का फर्क नज़र आता है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि, यह साबित कर दिखाया है पड़ोसी राज्य में सीमावर्ती जिले के पुलिस कप्तान ने।

जिनका निर्देश मिलते है चांदन थाना के SHO ने एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया जो, हर वक्त असलहे और कारतूस से लैस होकर भीड़ भरी आबादी के बीच खुलेआम सीनाजोरी करते चले आ रहे थे और अमन पसंद रियाया उन्हें अपना रक्षक मान बैठे थे।

दरअसल, बीते दिनों बांका जिले के SHO एक असलहे की जांच के सिलसिले में देवघर थाना पहुंचे थे जहां उन्होंने, आरोपी के बयान को सत्यापित करने के मकसद से LIC ऑफिस में तैनात एक निजी कम्पनी के सुरक्षागार्ड से पूछताछ की।

तफ्तीश के दौरान कुछ ऐसे चौकाने वाले तथ्य सामने आए जिसने अवैध असलहों का फ़र्ज़ी लाइसेंस बनाने वाले रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। शुरुआती तफ़्तीश के बिनाह पर चांदन थाना के तेज तर्रार थानेदार ने जो सबूत जुटाए उसने गिरोह में शामिल तमाम लोगों को बेनकाब तो कर दिया लेकिन, मास्टरमाइंड के गिरेबान अब भी खाकी की पहुंच से दूर थी.

लिहाज़ा, चांदन थाना प्रभारी रवि शंकर कुमार ने तफ़्तीश की कड़ी को आगे बढ़ाया और देवघर पहुंचकर दूसरे आरोपी से पूछताछ शुरू की और थोड़ी ही देर की तफ्तीश के बाद कहानी की पूरी स्क्रिप्ट खुद ब खुद सामने आ गई। इधर देवघर पुलिस ने भी एक आरोपी के खिलाफ कानून की डायरी में तहरीर कलमबद्ध कर अपनी पीठ थपथपाने में जुटी रही लेकिन, बिहार पुलिस की काबिलियत ने इनकी कहिलियत को भी बेनकाब कर दिया।

LIC जैसे वित्तीय लेन-देन वाले संस्थान से अवैध असलहों के साथ गिरफ्तार गार्ड के खुलासे ने सुरक्षा को लेकर पुलिस दावों की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह खड़ा होता है कि, देवघर जैसे शहर में और कितने ऐसे हथियारबंद गार्ड तैनात हैं जिनके लाइसेंस समेत उनके पर्सनल वैरिफिकेशन नहीं किए गए हैं, और अगर सुरक्षा के नाम पर कोई बड़ी वारदात पेश आती है तो जिम्मेदार कौन?.

ऐसे तमाम सवाल हैं जिनके जवाब का बड़ी ही बेसब्री से इंतज़ार है लेकिन, इस बीच एक बार फिर बांका जिले के पुलिस कप्तान ने अपनी टीम की काबिलियत का लोहा मनवाकर, झारखंड पुलिस को अनुसंधान और कार्रवाई का आईना तो दिखला ही दिया है।

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