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सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करने से बढ़ेगी कड़ाके की सर्दी, खरमास का होगा प्रारंभ

निधि राजदान ने NDTV छोड़ा

Gwalior: भारतीय ज्योतिष के नवग्रहों के राजा भुवन भास्कर सूर्य जब-जब देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करते हैं। तो उस कालखंड को खरमास की संज्ञा दी जाती है। संस्कृत में खरमास को गधा कहा जाता है। हिंदू पंचांग में खरमास 16 दिसंबर से प्रारंभ हो रहा है। और इसी दिन सूर्य का धनु राशि में प्रवेश भी होगा। इसके साथ ही बैंड, बाजा, बारात पर ब्रेक लग जाएगा। यानी विवाह आदि मांगलिक एवं शुभ कार्य बंद हो जाएंगे। लेकिन तीर्थ यात्रा, पूजा-पाठ, पवित्र नदियों में स्नान करने से जातकों को पापों से मिलेगी मुक्ति।

बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डॉं सतीश सोनी ने बताया कि खरमास में सूर्य अपनी प्रभावशाली किरणों को नियंत्रण कर देव गुरु बृहस्पति के स मान में नतमस्तक हो जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में शुभ कार्य एक माह के लिए रोक दिए जाते हैं।

खरमास में सूर्य के रथ के घोड़े करेंगे विश्राम, गधे करेंगे सेवा

सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करने से वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ, मीन राशि वालों के लिए शुभ समय रहेगा। शेष राशियों के लिए व्यर्थ की भागदौड़ बनी रहेगी। वही मार्कंडेय पुराण में वर्णन मिलता है कि जब सूर्य देव अपने वाहन यानी सात घोड़ों के सहारे सृष्टि की परिक्रमा कर रहे थे। सूर्य के अनवरत यात्रा के कारण सूर्य के सातों घोड़े हेमंत ऋतु में थक कर एक तालाब के किनारे विश्राम करने के लिए रुक जाते हैं। और तालाब का पानी पीना चाहते हैं। यह देखकर सूर्यदेव को याद आता है कि वह रुक नहीं सकते हैं। भले ही घोड़े थक कर रुक जाएं लगातार चलते रहने के नियम की बाध्यता के कारण सूर्य देव ने तालाब के पास खड़े दो गधों को अपने रथ में जोड़ लिया और अपनी यात्रा जारी रखी। इसी दौरान घोड़े पानी पीने के लिए रुक जाते हैं। घोड़े की तुलना में गधों की चाल काफी धीरे थी। ऐसे में वह अपनी मंद गति से यात्रा करते रहे। यही कारण है इस समय सूर्य का तेज बहुत कमजोर हो जाता है। और फिर मकर संक्रांति के दिन जब दोबारा सूर्य देव अपने घोड़ों को रथ में जोड़ते हैं। तब अपनी रफ़्तार दोबारा तेज कर देते हैं। इसके बाद से धरती पर सूर्य का प्रकाश तेजोमय हो जाता है। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही शीत लहर, पाला और कड़ाके की सर्दी से जनजीवन अस्त व्यस्त रहेगा।

खरमास का वैज्ञानिक पक्ष

सूर्य की तरह गुरु ग्रह में भी हाइड्रोजन और हीलियम की उपस्थिति होती है। सूर्य की तरह इसका केंद्र भी द्रव्य से भरा हुआ है। जिसमें अधिकतर हाइड्रोजन ही है। पृथ्वी से 15 करोड़ किलोमीटर दूर स्थित सूर्य तथा 64 करोड किलोमीटर दूर स्थित बृहस्पति ग्रह में एक बार ऐसा जमाल आता है। जिसकी वजह से पृथ्वी के कण काफी मात्रा में पृथ्वी में पहुंचते हैं। यहां एक दूसरे की कक्ष में आकर अपनी किरणों को आंदोलित करते हैं। इस कारण से व्यक्ति की मानसिक स्थिति में परिवर्तन आता है। जिससे मांगलिक कार्यों में व्यवधान संभव होता है। इसी कारण इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

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