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अभी तो मुफ्त कफन मिलने की बात है, जल्द ही मुफ्त कफन की चोरी करनेवाले यानी कफनचोर भी हर मुहल्ले में दिखेंगे, दिक्कत क्या है?

भला दुनिया का कौन गैरतमंद इन्सान होगा अथवा कौन ऐसा धर्म है, जहां मुफ्त कफन लेकर अंतिम क्रिया का प्रावधान है?

By: Krishna Bihari Mishra

हेमन्त जी, ये मुफ्त कफन देनेवाला आइडिया किस महान सलाहकार का है? ऐसे महान विभूतियों का दर्शन जनता को कराइये क्योंकि इनकी कृपा से ही राज्य में जल्द ही कफनचोर भी आनेवाले समय में दिखाई पड़ेंगे, क्योंकि जो भी योजनाएं बनती है, उन योजनाओं का बंटाधार करनेवाले लोगों की उत्पत्ति भी उसी समय हो जाती है। ऐसे में जहां तक मेरा मानना है कि आम तौर पर दुनिया का कोई व्यक्ति सब कुछ कहलाना पसन्द करता हैं, पर कफनचोर कहलाना पसंद नहीं करता।

अब राज्य में जल्द ही कफनचोर भी दिखाई पड़ेंगे, जब घोटालेबाजों की नजर मुफ्त की कफन पर पड़ेंगी। सचमुच में, धन्य है वे सलाहकार जो राज्य के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को इस प्रकार का बेतुका सलाह देकर, राज्य के मुख्यमंत्री का इमेज तबाह करने में लगे हैं, भला दुनिया का कौन गैरतमंद इन्सान होगा अथवा कौन ऐसा धर्म है, जहां मुफ्त कफन लेकर अंतिम क्रिया का प्रावधान है? अगर ये मुफ्त कफन से अंतिम संस्कार करने का प्रावधान होता तो ये लोकोक्ति कभी बनती ही नहीं कि “उसके पास कफन तक खरीदने को पैसै नहीं थे।”

सबसे पहले कफन क्या है? उसे जानिये, उसके महत्व और उसके उपयोग को जानिये, तब पता चलेगा और तब जब आप इस पर निर्णय लेंगे तो वह जनहित में होगा। ऐसे मैं आपको बता दुं कि कोई भी गैरतमंद इन्सान मुफ्त कफन लेने की बात सपने में भी नहीं सोच सकता, लेने की तो बात ही दूर है और न दुनिया का कोई इन्सान अपने जीते-जी कफन का नाम लेना पसन्द करता है, क्योंकि वो जानता है कि इसका उपयोग कब होता है?

दुर्भाग्य इस झारखण्ड का है, इसी झारखण्ड में एक ऐसा उपायुक्त भी हुआ, जो लोगों को सेवा देने को ताक पर रखकर उनके मरने के बाद क्या होगा, उसकी तैयारी कर बैठा, जिसको लेकर पूरे देश में इस झारखण्ड की किरकिरी हो गई, शायद आपको मालूम भी होगा कि वैसा महान उपायुक्त कौन होगा, वो जिला कौन सा है?

सच्चाई ये है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के इस बयान कि लोगों को मुफ्त में अब कफन मिलेगा, जैसे ही लोगों को मालूम हुआ, सभी आश्चर्य में पड़ गये, भाई इस प्रकार की योजना लागू करने का ख्याल मुख्यमंत्री के जेहन में कैसे आ गया? फिर जो सोशल साइट पर बावेला मचा, वो दुनिया देख रही है।

नदीम खान कहते हैं – “माननीय मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का आदेश राज्यवासियों को कफन मुफ्त दिया जायेगा। सरकार को कौन देता है, ऐसी की तैसी नायाब सलाह।”

राजेश स्वर्णकार कहते हैं – “कफन की जरुरत जनता को नहीं, उन सांसदों और विधायकों को हैं, जो कोरोना काल में सोए हुए हैं।”

जितेन्द्र पांडेय कहते हैं- “ झारखण्ड सरकार विकास की ओर बढ़ाया कदम, राज्य की जनता को कफन मुफ्त में मिलेगा। धन्य है सलाहकार लोग।”

रमेश पुष्कर कहते है – “हेमन्त सोरेन जी आप निःशुल्क कफनवाला आदेश वापस ले लीजिये, इसमें कोई इगो की बात नहीं, बल्कि घाट पर निःशुल्क जलावन की लकड़ियां यदि लोगों को उपलब्ध करा देंगे तो उन्हें बहुत मदद हो जायेगी। जिन गरीबों को श्राद्धकर्म के पैसे नहीं हैं, यदि उन्हें इसके लिए दस हजार रुपये की आकस्मिक सहायता कर सकते हैं, तो उन्हें बहुत मदद मिलेगी।”

धर्मेन्द्र सिंह कहते हैं – “ब्रेकिंग न्यूज, झारखण्ड सरकार, झारखण्ड की जनता को देगी कफन मुफ्त, हेमन्त हैं तो मुमकिन है।”

दीपक कुमार कहते हैं – “मुफ्त का कफन सफेद होगा या उसमें सरकार का फोटो लगा के देगी। झारखण्ड, मुफ्त कफन।”

मतलब पूरे झारखण्ड में सरकार के इस निर्णय पर बावेला मचा है, हर धर्म के लोग सरकार के इस मुफ्त कफन देनेवाले निर्णय को गलत कहने से नहीं चूक रहे, पर सरकार को सलाह देनेवालों को इससे क्या मतलब?

ये जब तक सरकार गिरेगी नहीं, तब तक नई सरकार आयेगी नहीं और जब तक नई सरकार आयेगी नहीं, तब तक आनन्द का इन्तजाम कैसे होगा? क्योंकि धीरे-धीरे तो सभी वहीं लोग सत्ता के इर्द-गिर्द पहुंच गये, जो इन्हीं सभी के लिए जाने जाते थे।

चलिए हमें क्या? अगर इसी प्रकार का निर्णय लिया जाता रहा, तथा डाक्टरों व पत्रकारों को निशाना बनाया जाता रहा, तो सरकार का भी बैंड बजने में देर नहीं लगेगा, हालांकि बैंड बजने की तैयारी अभी से शुरु हो गई हैं। सरकार जान लें, भारत में तो जब बच्चा जन्म लेता हैं, युवा शादी करता हैं या बुढ़ा मरता है, सभी में बैंड बजता है, फिर भी बुढ़े के मरने के बाद भी उसका परिवार मुफ्त का कफन लेने से परहेज करता है, क्योंकि समाज इसी को देखकर तो ताना मरता है, कहता है –कि “अबे तू क्या बात करेगा, तेरे बाप के मरने के समय, तो तेरे पास कफन तक के पैसे नहीं थे, जब दूसरे ने दिया, तब जाकर तुम्हारे बाप का अंतिम संस्कार हुआ”।

और जब सरकार ने ऐसा निर्णय लिया हैं तो समझिए ये कफन किसके काम आयेगा, मैं तो उसका उत्तर जानता हूं कि कफन चोरों का, क्योंकि ये कफन चोर मुफ्त की सूची भी बना देंगे और कहेंगे कि हमने इतने लोगों को कफन दे दिये।

हे राम कैसे-कैसे लोग हैं यहां, जो इस प्रकार की सलाह देते हैं।

(लेखक झारखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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