
Deoghar: राजकीय श्रावणी मेला 2026 समाप्ति की ओर है। पुरे श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और नगर निगम लगातार व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटा नजर आया। अभी भी अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इस कड़ी में देवघर की नगर आयुक्त सुलोचना मीणा का अंदाज काबिल-ए-तारीफ रहा। देर रात स्कूटी से मेला क्षेत्र में व्यवस्थाओं का जायजा लेते सड़क पर उन्हें देखा जा सकता है। नगर आयुक्त के इस अंदाज की काफी प्रशंसा हो रही है।

नगर आयुक्त देर रात अकेले ही स्कूटी पर सवार होकर मेला क्षेत्र पहुंचती हैं और मेला क्षेत्र की जमीनी स्थिति का जायजा लेती हैं। इस दौरान उन्हें श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं से अवगत होते भी देखा जा सकता है।

दरअसल, मेला क्षेत्र में लोगों की भीड़ काफी होती है और बड़े वाहनों का पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे में यातायात में कोई व्यवधान न आए और श्रद्धालुओं को कोई परेशानी ना हो इसलिए नगर आयुक्त स्कूटी से मेला क्षेत्र का निरीक्षण करने निकलती हैं।
वो कहती हैं कि क्षेत्र में रहने वाली जनता की सुविधा जरूरी है। उनका मानना है कि सरकारी सुविधाएं जनता के लिए होती हैं और अगर इन्हीं सुविधाओं के लिए जनता को इंतजार करना पड़े या परेशानी उठानी पड़े तो ऐसी व्यवस्था का कोई मतलब नहीं है। साधारण रूप में सड़क पर निकलने का एक फायदा यह भी है कि वह जमीनी हकीकत से अवगत हो पातीं हैं।
नगर आयुक्त के अनुसार, किसी अधिकारी के लिए उसके क्षेत्र में रहने वाले लोग और वहां काम करने वाले कर्मचारी सबसे महत्वपूर्ण होने चाहिए। अधिकारियों को अपनी सुविधा से ज्यादा जनता की सुविधा का ध्यान रखना चाहिए।
सरल स्वभाव और अलग अंदाज में काम करने वाली नगर आयुक्त सुलोचना मीणा की यह कार्यशैली अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि झारखंड को ऐसे अफसरों की जरूरत है।
बता दें कि नगर आयुक्त सुलोचना मीणा 2022 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं और वर्तमान में देवघर नगर निगम की नगर आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं। सुलोचना मीणा ने मात्र 22 वर्ष की उम्र में ही यूपीएससी की परीक्षा पास की। देवघर से पहले वह पलामू में एसडीओ के पद पर भी रह चुकी हैं। वहां भी उनका काम उल्लेखनीय रहा है।



