
Deoghar: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला की तैयारियों का जायजा लेने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी रविवार को देवघर सदर अस्पताल पहुंचे। औचक निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अस्पताल के इमरजेंसी, विभिन्न वार्डों, जांच केंद्र, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और ओपीडी समेत पूरी व्यवस्था को बारीकी से देखा।

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के बेड के पास जाकर उनसे मुलाकात भी की और मिल रही चिकित्सा सुविधाओं व दवाओं की उपलब्धता की सीधी जानकारी ली। निरीक्षण के बाद उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार और अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिया कि मेला शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां और कमियां हर हाल में दुरुस्त कर ली जाए।

श्रद्धालुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार

मीडिया से रुबरु होते हुए इरफ़ान अंसारी ने सदर अस्पताल की व्यवस्था को संतोषजनक बताते हुए कहा कि श्रावणी मेला में देश-विदेश से आने वाले लाखों कांवरियों और श्रद्धालुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। इसके लिए बहुत जल्द स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की जाएगी।
मेला में विशेष मोटरसाइकिल एंबुलेंस तैनाती की घोषणा
उन्होंने घोषणा की कि मेले के दौरान देवघर में दूसरे जिलों से अतिरिक्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक एंबुलेंस और संकरी गलियों के लिए विशेष मोटरसाइकिल एंबुलेंस की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मेले के दौरान निजी अस्पतालों को भी 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया जा रहा है।
निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगेगी रोक
राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सुधारों की चर्चा करते हुए डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि झारखंड सरकार जल्द ही निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए एक एसओपी (SOP) लागू करने जा रही है, जिसके तहत आईसीयू और एनआईसीयू जैसी जीवन रक्षक सेवाओं की दरें (Charges) फिक्स की जाएंगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा का दोबारा टेंडर पूरा हो चुका है और जल्द ही जनता को हाईटेक एंबुलेंस की सेवा मिलने लगेगी।
देवघर एम्स की कार्यप्रणाली पर मंत्री ने उठाये सवाल
स्वास्थ्य मंत्री ने देवघर एम्स की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एम्स जैसे प्रतिष्ठित और बड़े संस्थान से लगातार मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है, जबकि उन मरीजों का इलाज सदर अस्पताल के डॉक्टर आसानी से कर दे रहे हैं। उन्होंने एम्स प्रबंधन को नसीहत देते हुए कहा कि चिकित्सा संस्थानों को राजनीतिक गतिविधियों का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। अस्पताल का मूल काम मरीजों की सेवा और इलाज करना है, राजनीति करना नहीं।


