
Deoghar: देवघर के रिखिया केस नंबर 80/2019 सरकार बनाम शशांक शेखर भोक्ता एवं अन्य 19 अभियुक्तों को अदालत द्वारा “बरी” कर दिया गया है। शक्रवार को रजिस्ट्रार कोर्ट के न्याययिक दडांधिकारी प्रतीक रंजन ने सुनवाई के बाद सभी 20 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

दरअसल, यह मामला लोकसभा चुनाव 2019 के के समय उस समय सामने आया था, जब देवघर के बैद्यनाथपुर चौक के पास जिला प्रशासन द्वारा ईवीएम से भरे ट्रक को ले जाने के दौरान संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इस दौरान बैद्यनाथपुर चौक के पास कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध करते हुए सड़क जाम किया था। सड़क जाम करने वालों पर ईवीएम लूटने और वाहन नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज किया गया था। हालांकि कोर्ट ने इन पर लगे आरोपों को सिद्ध नहीं माना और सभी को बरी कर दिया।

सुनवाई के दौरान गवाह ने अदालत को बताया कि न तो किसी वाहन की लूट हुई थी और न ही कोई नुकसान पहुंचाया गया था। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रीतम सिंह एवं राजेश कुमार शाही ने प्रभावी ढंग से अपनी दलीलें पेश की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस फैसले के साथ शशांक शेखर भोक्ता, सुरेश पासवान सहित कुल 20 लोगों को राहत मिली है।
कोर्ट से जिन आरोपियों को बरी किया है, उनमें शशांक शेखर भोक्ता, सुरेश पासवान, मुन्नम संजय, सुरेश शाह, बिनोद वर्मा, भूतनाथ यादव, देवनन्दन झा उर्फ नुनु झा, दीपक सिंह राजपूत, मणिकांत यादव, बेनी चौबे, रंजीत यादव, दिनेशानंद झा, आदित्य सरोलिया, कुणाल सिंह, राहुल सिंह, सुधीर दास, सुनील यादव, दिलीप यादव और राजेश यादव शामिल हैं।
साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान ये मामला काफी चर्चित हुआ था। बरी होने वालों में झामुमो के वरीय नेता सुरेश साह ने बताया कि यह मामला एक सोची समझी साजिश के तहत हमारी छवि खराब करने के उद्देश्य से बनाया गया था। बल्कि सच्चाई यह है कि ईवीएम से भरे ट्रक को लेकर संदेह की स्थिति बनी थी,जिसके कारण कुछ लोगों द्वारा रोड जाम किया गया था। न तो किसी गाड़ी की लूट हुई थी, न ही किसी प्रकार की क्षति पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद,साजिशन पूरे मामले को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया और निर्दोष लोगों पर केस थोप दिया गया। यह सब उस समय के तत्कालीन सरकार के रहनुमाओं की गहरी साजिश का हिस्सा था।
सुरेश साह ने कहा कि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” शुक्रवार को न्यायालय ने भी यही साबित कर दिया। मुकदमे के दौरान कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हो सका, गवाह भी अपने बयान पर टिक नहीं पाए।
श्री साह ने कहा कि हम सभी को शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था, और आज सत्य की जीत हुई।


