
Deoghar Book Fair : देवघर में 23वां पुस्तक मेला का आयोजन देवघर के बीएड कॉलेज में किया जा रहा है। पुस्तक अज्ञानता से ज्ञान की ओर बनाने का सबसे बड़ा माध्यम है।आज के इस आधुनिक युग में लोग पुस्तक से दूर और डिजिटल दुनिया के ज्यादा करीब पहुंच रहे हैं। पुस्तकों से लोगों के रिश्ते अब बेहद कमजोर होने लगे हैं.

पुस्तक मेला एक बड़ा उद्देश्य है कि पुस्तक के प्रति लोगों को जागरुक कर पुस्तक की खरीदारी से लेकर पुस्तक मेला में आकर विभिन्न पुस्तक को पढ़े। लेकिन देवघर पुस्तक मेला का उद्देश्य किताबों को या पब्लिकेशन को बढ़ाना नहीं है देवघर पुस्तक मेला सिर्फ और सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच के रूप में विकसित हो रहा है.

पुस्तक मेला के निमंत्रण पत्र में भी साफ तौर पर देखा गया है कि विभिन्न कार्यक्रम का सूची दिया गया है ना कि यह दिया गया है कि कौन से पब्लिकेशन की किताबें पुस्तक मेला में उपलब्ध है. पुस्तक के प्रति लोगों को जागरुक कर ज्यादा से ज्यादा लोगों का खिंचाव पुस्तक की हो रहो उसके लिए कोई पहल की जाए।
बड़ा सवाल उठता है की पुस्तक मेला जैसे प्लेटफार्म में सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम करा देना क्या पुस्तक मेला को पूर्ण रूप से सफल माना जाएगा?
इसके अलावा शहरवासी की माने तो पुस्तक मेला का वह रौनक नहीं रहा जो पहले हुआ करता था. भले ही 2 रुपया 5 रुपया या 10 रुपया का टिकट लेना पड़ता था. लेकिन पुस्तक मेला में रौनक हुआ करता था और पुस्तक के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता था.
शहरवासी ज्यादा से ज्यादा पुस्तक मेला में पहुंचते थे और पुस्तक की खरीदारी करते थे. लेकिन दौर बदला पुस्तक मेला आज भी लग रहा है. लेकिन पुस्तक से नाता लोगों का नहीं रहा. अब सिर्फ सरकारी फंड या सांसद, विधायक निधि फंड से ही किताबों की बड़ी खरीदारी की जाती है और बस एक कोरम पूरा कर लिया जा रहा है।
इसके अलावा पुस्तक मेला को अब एक बड़ा विज्ञापन का जगह मान लिया गया है. पूरा पुस्तक मेला में विभिन्न विभिन्न कारपोरेट कंपनियों के बड़े-बड़े होर्डिंग बैनर लगे हुए हैं जो साफ दर्शाता है कि अब लोगों का आकर्षण किताबों पर नहीं वहां के कॉर्पोरेट विज्ञापन का हैऔर सांस्कृतिक कार्यक्रम का है.



