
Ranchi : झारखंड के खूंटी जिला अंतर्गत मुरहू थाने के हवालात में बीएसएफ जवान राहुल मांझी की मौत पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए शुक्रवार को सैकड़ों लोगों ने थाने के सामने प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने घटना को हत्या करार देते हुए आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 29 सितंबर की शाम माहिल गांव के कुछ लोगों ने राहुल पर छेड़खानी का झूठा आरोप लगाया।

बताया गया कि उसी शाम करीब छह बजे बिजला उरांव, मोती उरांव, बुधुवा उरांव, कार्तिक मुंडा सहित 10-12 लोग राहुल के घर पहुंचे और उसे जबरन उठाकर माहिल गांव ले गए। वहां उसे मारपीट कर रस्सी से बांधकर रखा गया और बाद में पुलिस को सौंप दिया गया।
पुलिस का कहना है कि 30 सितंबर की सुबह राहुल मांझी ने थाने के टॉयलेट में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दूसरी ओर, राहुल मांझी के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर को ही उन्होंने थाने में आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई थी, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद खूंटी के पुलिस अधीक्षक मनीष टोप्पो ने मुरहू थाना के थानेदार रामदेव यादव को निलंबित कर दिया था। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
बताया गया कि राहुल मांझी बीएसएफ में पदस्थापित थे और उनकी अंतिम तैनाती सिलीगुड़ी में थी। वह कुछ महीने पहले छुट्टी पर घर आए थे और वापस कैंप नहीं लौटे।
परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि झूठे आरोपों में राहुल को न सिर्फ अपमानित किया गया, बल्कि बेरहमी से उनकी पिटाई भी की गई। इस मामले में पुलिस का रवैया एकतरफा रहा।
राहुल को पीटते हुए थाना लाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बदले पुलिस ने राहुल को ही हवालात में बंद कर दिया। थानेदार भी उनकी मौत के जिम्मेदार हैं। (IANS)


