
Deoghar: अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय-सह-साइबर मामलों के विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने साइबर अपराध एवं धोखाधड़ी से संबंधित कांड संख्या 159/2020 में सुनवाई पूरी कर शुक्रवार को फैसला सुनाया।

अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी पाकर सजा सुनाई, जबकि पाँच अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

दोषी अभियुक्तों में कुलदीप कुमार दास एवं विकास कुमार दास को आईटी एक्ट की धारा 66(डी) तथा भादवि की धारा 420 के तहत दोषी पाते हुए क्रमशः तीन-तीन वर्ष की साधारण कैद और एक-एक लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 420 के तहत सात वर्ष की साधारण कैद एवं एक-एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा नहीं करने पर उन्हें छह माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी।
इसी प्रकरण में पवन कुमार दास को आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत तीन वर्ष की साधारण कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना नहीं चुकाने पर उसे तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
वहीं, आरोपित निरंजन दास, रितेश कुमार दास, प्रदीप कुमार दास, चंदन कुमार दास एवं उमेश महरा को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया।
मामले में 17 जून 2020 को साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विचारण के दौरान कुल 13 गवाहों का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक अजय कुमार साह ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अली अतहर, प्रदीप कुमार अकेला, शिवदत्त रेणू एवं हेम चरण झा ने बहस में भाग लिया।
साइबर अपराध के एक अन्य मामले में आरोपित बरी
एक अन्य मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय-सह-साइबर मामलों के विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार की अदालत ने एक साइबर अपराध एवं धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद आरोपित को बरी कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर क्राइम केस संख्या 36/2020 के तहत सारवां थाना क्षेत्र के बाभन कुंड निवासी उत्तम दास पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह मामला मूल रूप से सारठ थाना कांड संख्या 111/2017 से संबंधित था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पाँच गवाह प्रस्तुत किए गए, किन्तु उन्होंने न्यायालय में आरोपों का समर्थन नहीं किया। गवाहों के परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण के साथ ही दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपित को दोषमुक्त करार देते हुए रिहा करने का आदेश सुनाया।


