
Ranchi: झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के रिजल्ट जिस तरह से आए हैं उससे बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है। बीजेपी की रणनीति पूरी तरह से फेल होती दिख रही है। खास तौर पर झारखंड में बीजेपी का चुनावी मुद्दा संथाल परगना क्षेत्र से “घुसपैठियों” को बाहर निकालना था, लेकिन यह झामुमो द्वारा खेले गए ‘आदिवासी’ कार्ड के सामने फीका पड़ गया।

संथाल प्रमंडल में जहां आदिवासी वोटरों की संख्या ज्यादा है। यहां पर बीजेपी का रोटी बेटी माटी का नारा पूरी तरह से फेल रहा। यहां बरहेट से हेमंत सोरेन, दुमका से बसंत सोरेन, जामा से लुईस मरांडी, महेशपुर से स्टीफन मरांडी ने जीत दर्ज की।

फेल रहा बीजेपी का ‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ का मुद्दा
इस बार चुनाव में बीजेपी ने डेमोग्राफी चेंज का मुद्दा जोर शोर से उठाया था। बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा मुख्य रूप से संथाल के लिए ही था। बीजेपी लगातार ये दावा करती रही कि संथाल में डेमोग्राफी चेंज हो रहा है। बीजेपी के बड़े से छोटे नेता ने हर एक मंच पर कहा कि झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठ हो रही है। पीएम मोदी तक ने अपनी सभा में कहा कि घुसपैठिए झारखंड की बेटियों को फुसलाकर शादी करते हैं और फिर उनकी जमीन पर कब्जा कर लेते हैं। बीजेपी ने रोटी बेटी माटी को बचाने का नारा दिया। लेकिन झारखंड में बीजेपी का ये मुद्दा पूरी तरह ना सिर्फ फेल रहा बल्कि इसका उल्टा असर हुआ।
संथाल में बीजेपी को सिर्फ एक सीट
संथाल में बीजेपी को 2014 में 7 सीटें मिली थीं। लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव ये घट कर 4 सीटों पर पहुंच गई। इस बार बीजेपी को उम्मीद थी कि वे संथाल में कम से कम 10 से 12 सीटें जीतेगी मगर इस बार ये रिकॉर्ड और भी ज्यादा खराब हो गया। बीजेपी घट कर एक सीट पर आ गई।



