
Deoghar: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) दुमका की टीम ने देवघर के सिविल सर्जन डॉ रंजन सिन्हा को बुधवार को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। बतौर रिश्वत 70 हजार रुपए नगद लेते हुए सिविल सर्जन रंगे हाथ पकड़े गए।

जानकारी के अनुसार एक नर्सिंग होम के प्रोविजनल प्रमाण-पत्र रेन्युअल के नाम पर सिविल सर्जन ने रिश्वत मांगी थी।

क्या है मामला
देवघर सिविल सर्जन डॉ रंजन सिन्हा ने कॉलेज रोड मधुपुर स्थित बंगाल नर्सिंग होम नामक हॉस्पिटल चलाने वाले पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिला के आसनसोल थाना क्षेत्र निवासी ओके रोड रेलपार निवासी मो महफूज आलम से प्रोविजनल प्रमाण-पत्र रेन्युअल के नाम पर पहले डेढ़ लाख रूपये कि मांग की थी। काफी आरजू विनती के बाद तीन चार किस्त में रुपया देने की बात बनी। उपरांत महफूज आलम ने एसीबी से संपर्क साधा। 16 अक्टूबर को सिविल सर्जन ने उसे पहली किश्त घूस लेकर अपने कालिबाड़ी बेलबागान स्थित अपने आवास के नवजीवन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर पर बुलाया था। इसकी लिखित शिकायत महफूज ने एसीबी को दी थी। वह एसीबी टीम के अनुसार घूस देने पहुंचा। जैसे ही उसने घूस की रकम सिविल सर्जन को दी, उसी दौरान एसीबी की टीम ने सिविल सर्जन डॉ रंजन सिन्हा को दबोच लिया और अपने साथ दुमका लेकर चली गई।
बताया जा रहा कि मो. महफूज आलम कॉलेज रोड मधुपुर में वर्ष 2020 से एक 10 बेड का हॉस्पिटल चलाने का कार्य करते हैं। उक्त अस्पताल का 9 जून 2024 तक प्रोविजनल प्रमाण पत्र था जिसका उन्हें रिन्यूअल करना था। इसी बीच वह बीमार पड़ गया। उसके गॉल ब्लाडर का ऑपरेशन हुआ था इस वजह से रेनुअल कराने के लिए देर से आवेदन दिया। काफी दिनों तक जब इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वह सिविल सर्जन से मिलने गए। सिविल सर्जन ने एक लाख रूपये रेनुअल के नाम पर रिश्वत मांगी। महफूज के काफी विनती के बाद तीन चार किस्त में रूपये देने की बात बनी। उपरांत महफूज ने दुमका एसीबी में इसकी शिकायत 15 अक्टूबर को दिया। उसके बाद एसीबी दुमका की टीम ने सिविल सर्जन को घूस लेते गिरफ्तार करने के लिए जाल बिछाया।


