
Deoghar: स्थानीय देवघर स्थित केयर डायग्नोस्टिक केंद्र ने शहर को आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में संथाल परगना ही नहीं बल्कि पूरे झारखंड में अग्रणी स्थान पर खड़ा कर दिया है। ज्ञात हो की संपूर्ण शरीर के एम आर आई के लिए विश्व का सबसे आधुनिक मशीन 3.0 टेशला एम आर आई का केयर डायग्नोस्टिक्स में अगस्त 26 से शुभारंभ हो रहा है।

संस्थान के संचालक डॉक्टर सुगंधा प्रियदर्शनी में बताया कि मस्तिष्क, रीड़, जोड़, हृदय, लीवर, स्तन और कई अन्य अंगों की बीमारी एम आर आई चित्रों द्वारा ज्यादा सटीक रूप से पहचाना जा सकता है । इससे बीमारी के अवस्था की सटीक जानकारी मिलती है एवं विधिपूर्वक इलाज करना संभव हो पाता है । साथ ही उन्होंने बताया कि एमआरआई स्कैन एक गैर आक्रामक और दर्द रहित इमेजिंग तकनीक है। इससे रेडिएशन का कोई खतरा नहीं रहता है।

मुख्य रूप से आज के चिकित्सा शैली में इस मशीन का उपयोग निम्नलिखित परिस्थितियों में किया जाता है :
- ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का पता लगाने के लिए,
- रीड़ की हड्डी और मस्तिष्क की समस्याओं का पता लगाने के लिए,
- गर्भ और लीवर कैंसर का डायग्नोस्टिक्स करने के लिए,
- इनफर्टिलिटी का इलाज करवा रही महिलाओं में गर्भाशय की असमानताओं का पता लगाने के लिए,
- महिलाओं में पेल्विक दर्द के कारणों का मूल्यांकन करने के लिए, जिसमें एंडोमेट्रियोसिस और ….
जानकारी हो कि इसके पहले वाले एमआरआई मशीन में मरीज को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पूर्व के मशीन में असहनीय आवाज होता था और वह एक बंद डब्बे की तरह होने के कारण मरीज के लिए भययुक्त था। ऐसे मरीज जिन्हें क्लस्ट्रोफोबिया नामक दिक्कत होती थी उनके लिए एमआरआई कराना एक बुरे सपने की तरह साबित होता था क्योंकि ऐसे मरीजों को स्थान बंद होने के बाद काफी घबराहट होती है । यह मशीन मरीज को उपरोक्त सभी परेशानियों से निजात दिलाने वाली है । इसके आने से एमआरआई कराना काफी सहज हो गया है ।
चिकित्सक निम्नलिखित अंगों की जांच के लिए एमआरआई का उपयोग करते हैं :-
- मस्तिष्क
- रीड की हड्डी
- जोड़ (टखना , कंधा , कुल्हा, घुटना, कलाई)
- पेट
- पेल्विक एरिया
- स्तन
- रक्त वाहिकाएं
- हृदय
नस संबंधित मरीज, सड़क दुर्घटना वाले मरीज एवं अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज के इलाज में यह मशीन अत्यधिक कारगर साबित होता है । फिलहाल इस तरह के शारीरिक परीक्षण के लिए मरीज को रांची या पटना का दौड़ लगाना पड़ता है । देवघर के लिए यह गर्व की बात है कि जिस परीक्षण के लिए यहां से मरीज बाहर जाया करते थे उसी प्रशिक्षण के लिए अब दूसरे शहरों से मरीज देवघर आएंगे ।


