
Deoghar: संताल परगना चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, देवघर के कार्यकारिणी की एक विशेष बैठक श्रावणी मेला के मुद्दे पर आहूत की गई। बैठक में श्रावणी मेला की तैयारियों के परिपेक्ष्य में जिला प्रशासन द्वारा चेंबर सहित अन्य स्टेकहोल्डर्स की अनदेखी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

सदस्यों ने बताया कि पहली बार हो रहा है जब चेंबर एवं अन्य स्टेकहोल्डर और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ जिला प्रशासन ने श्रावणी मेला से पूर्व एक भी बैठक ना की हो। चेंबर ने 29 मई को ही उपायुक्त से एक बैठक की मांग की थी जिस पर उनकी सहमति तो मिली, लेकिन आज तक बैठक के लिए कोई समय निर्धारित नहीं किया गया। इस पर चेंबर को गहरी नाराजगी है। जिला प्रशासन 6 महीने से भी ज्यादा समय से श्रावणी मेला की तैयारी और समीक्षा बैठक कर रही है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कल मेला का उद्घाटन होना है और आज तक प्रशासन ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के साथ एक भी बैठक नहीं की है जिससे स्थानीय निवासियों में क्षोभ व्याप्त है।

चेंबर ने व्यवसायिक हित के मामलों जैसे खाद्यान्न वस्तुओं के दर निर्धारण, ट्रैफिक प्लान आदि मुद्दों पर किसी भी बैठक में चेंबर को नहीं बुलाने पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। चेंबर का मानना है कि खाद्यान्न वस्तुओं का दर निर्धारण असंगत है। दर निर्धारण की जगह दर नियंत्रण पर निर्णय होना चाहिए। चेंबर ने मेला में बिजली वितरण की व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त किया है तथा आशंका व्यक्त की है कि मेले के दरमियान अबाधित बिजली आपूर्ति हो सकेगी। चेंबर ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि नो इंट्री जोन में खाद्य वस्तुओं और पेय पदार्थों की आवाजाही पर रोक नहीं हो।
चेंबर ने कहा है कि रात्रि में नो इंट्री में मालवाहक गाड़ियों के लिए रात्रि 10:00 से सुबह 8:00 बजे तक प्रवेश करने से छूट होती है। उस समय ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को पूर्व से ही उचित दिशा निर्देश देने की मांग की है ताकि मेला के दरमियान व्यवसायियों और पुलिसकर्मियों के बीच अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न ना हो।
पूर्व के वर्षों में मेला पूरा देवघर शहर में अच्छादित रहता था लेकिन पिछले कई वर्षों से ऐसा देखा जा रहा है कि मेला क्षेत्र विशेष में सीमित होकर रह गया है। इस पर स्थानीय स्टेकहोल्डर्स और जिला प्रशासन को मिल बैठकर समीक्षा करने की जरूरत है ताकि मेला का विस्तार पूरे शहर में हो और स्थानीय निवासियों का व्यवसायिक और आर्थिक हित भी पूरे हों। शहर में छोटी निजी गाड़ियों के प्रवेश पर भी वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की जरूरत है ताकि होटल एवं अन्य हॉस्पिटलिटी व्यवसाय की अनदेखी न हो। छोटी निजी चारपहिए वाहन के लिए शहर में भी कुछ सार्वजनिक पार्किंग निर्धारित हो और शहर से निकटतम स्थानों तक उसकी आवाजाही हो। इसपर अविलंब प्रशासन चेंबर से विमर्श कर एक सम्मानजनक हल निकाले। अस्थाई पार्किंग स्थलों से शहर और मेला क्षेत्र में पहुंचने के लिए ऑटो और टोटो, रिक्शा आदि के चलने की मुक्कमल व्यवस्था बने।
पहली बार मेला में स्वयंसेवकों द्वारा लगाए जाने वाले सेवा शिविरों पर प्रशासनिक अनुमति के लिए असमंजस की स्थिति बनना काफी चिंताजनक है। लोगों को सेवा शिविर लगाने के लिए पर्याप्त सुविधा और किसी तरह की रोक-टोक नहीं होनी चाहिए। सेवा कार्य पूर्णतः स्वैच्छिक होती है और प्रशासन को इसमें पूर्ण सहयोग करना चाहिए।
*चेंबर के अध्यक्ष आलोक मल्लिक ने बताया कि प्रशासन और कांवरिया सेवा के बीच समन्वय के लिए चेंबर अपने स्तर से पूरे मेला अवधि में पर्यवेक्षण एवं मॉनिटरिंग का काम करेगी।* उन्होंने यह भी बताया कि चेंबर की चिंताओं से अवगत कराने के लिए माननीय मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखा जाएगा।
आज की बैठक में चेंबर अध्यक्ष और महासचिव के साथ उपाध्यक्ष संजय मालवीय और उमेश राजपाल, कोषाध्यक्ष दीपक सराईयां, कार्यकारिणी सदस्य प्रिंस सिंघल, निर्मल कुमार, साल्टी अग्रवाल, गणेश भालोटिया आदि उपस्थित थे।



