
Deoghar: देवघर कोर्ट के सबजज 8 शमा रौशनी कुल्लू की अदालत ने आज शारदा देवी केजरीवाल बनाम झारखंड राज्य मारफत उपायुक्त देवघर Title (D) Suit No–0065 of 2008 में ऐतिहासिक महत्व का फैसला देते हुए शारदा देवी केजरीवाल द्वारा देवघर शहर के राजकीयकृत मध्य विद्यालय बम्पास टाउन वाली जमीन और मकान पर वादिनी शारदा देवी केजरीवाल के बिक्रीपत्र के आधार पर खरीददार मालिक होने के दावा को खारिज कर दिया और विद्यालय की जमीन और इसपर स्थित मकान को सरकार के कब्जे से हटाकर शारदा देवी केजरीवाल के पुत्र को दखल दिलाने की प्रार्थना को खारिज कर दिया है।

सनद रहे कि देवघर शहर में और आसपास कई राजकीय विद्यालय के भवन और जमीन का विक्रीनामा कई लोगों ने लेकर रखा है और येन-केन प्रकारेण उसे लोग हासिल करना चाहते है। जिनमे राजकीयकृत मध्य विद्यालय राम मंदिर झौंसागढ़ी, मध्य विद्यालय चरकीपहाड़ी अंचल मोहनपुर इत्यादि एक दर्जन सरकारी स्कूल पर भू-माफियायों का दावा है।

लेकिन सरकार की ओर से देवघर कोर्ट के अपर सरकारी अधिवक्ता अशोक राय सह अधिवक्ता अपने बहस और दाखिल अपने लिखित बहस में बिहार गैर सरकारी प्राथमिक विद्यालय (नियंत्रण एवं अधिग्रहण ) अधिनियम 1976 के सुसंगत धाराओं को ब्याख्या और उनका हवाला न्यायालय को देते हुए बताया कि इस कानून के तहत जितने भी विद्यालय का सरकारीकरण 1976 में या उसके बाद हुआ है सरकारीकरण के बाद उस विद्यालय की जमीन मकान सभी पर राज्य सरकार का मालिकाना हक है और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकारीकरण के पहले उस जमीन या मकान पर किसका कागजी अधिकार था महज बिक्रीनामा रजिस्ट्रेशन हो जाने से कोई मालिकाना हक नहीं प्राप्त कर सकता है।
वादीनी शारदा देवी केजरीवाल द्वारा दायर इस सिविल वाद का संचालन महेश्वर प्रसाद सिन्हा वरीय अधिवक्ता देवघर कोर्ट ने किया और राज्य सरकार की ओर से अशोक राय अधिवक्ता सह अपर सरकारी अधिवक्ता ने भाग लिया जिसमें जीत झारखंड सरकार की हुई और विद्यालय की जमीन पर विद्यालय का हक बरकरार रहा।
गौरतलब है कि अशोक कुमार राय अधिवक्ता सह Additional Govt Pleader ने सरकारी विद्यालयों की जमीन पर सरकार के पक्ष में सारठ मध्य विद्यालय , राय बहादुर जगदीश प्रसाद सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाभनगामा,मध्य विद्यालय चरकीपहाड़ी अंचल मोहनपुर राममंदिर मिडिल स्कूल की जमीन हेतु निजी अधिवक्ता के रूप में बिना फीस के शिक्षप्रेमी के रूप में पहले कार्य किया है क्योंकि उनके पिता स्वर्गीय नंदकिशोर राय मध्य विद्यालय सारठ में शिक्षक थे और उनकी ही प्रेरणा से सारठ मिडिल स्कूल का केस अशोक राय ने बिना फीस पहली बार लड़कर उक्त विद्यालय की जमीन बचाई थी तब से उनका सरकारी विद्यालय से लगाव और सरकारी विद्यालय के पक्ष में कानून लड़कर जीतने का जुनून सा है।


