
Deoghar: देवघर नगर थाना क्षेत्र के श्यामगंज रोड स्थित कृष्णा टॉकिज के पास 11 फरवरी की देर रात को हुए गोलीबारी में दो पुलिस के जवान की मौत हो गयी थी। इस मामले में नगर थाना तीन अलग-अलग मामला दर्ज किया गया था। पहला मामला पुटटी देवी , दूसरा मामला नगर थाना प्रभारी केके ककुशवाहा और तीसरा मामला सुधाकर झा ने दर्ज कराया था।
किसको कौन मामले में भेजा जेल

नगर थाना पुलिस ने कांड संख्या 60 में मारपीट जानलेवा हमला एवं अर्म्स एक्ट मामले में देवलाल हेम्ब्रम उर्फ हीरो, प्रियेस कुमार, नगर थाना कांड संख्या 61 में हत्या एवं अर्म्स एक्ट मामले में सुधाकर सुमन झा श्यामगंज रोड अंडापट्टी, तथा कांड संख्या 62 में जानलेवा हमला एवं अर्म्स एक्ट में विशाल कुमार, दशरथ कुमार, आनंद कुमार, प्रियांशु कुमार और पुट्टी देवी को आरोपी बनाकर बुधवार को जेल भेज दिया।
क्या है पुरा मामला

बीते 11 फरवरी की देर रात को श्यामगंज अंड्डापट्टी निवासी सुधाकर झा और पप्पू सिंह के परिवार के बीच कोई विवाद को लेकर पहले जमकर मारपीट हुई थी। उसके बाद मामला बढ़ गया तो सुधाकर झा अपने दो सरकारी अंगरक्षक के साथ पहले वहां पहुंचे। दोनों अंगरक्षक सिविल में ही था। सुधाकर सुमन झा ने घटना की जानकारी सदर एसडीपीओ पवन कुमार को दिया। एसडीपीओ के निर्देश पर नगर थाना प्रभारी केके कुशवाहा और एसआई संजीत कुमार एक जवान के साथ घटनास्थल पहुंचे। पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचते ही गोलीबारी शूरू हो गयी। जबाव में थाना प्रभारी ने अपने सर्विस पिस्टल से पांच और एसआई संजीत कुमार ने एक फायर किया। इस गोलीबारी में सुधाकर सुमन झा के दोनों सरकारी अंगरक्षक क्रमश: संतोष यादव और रवि मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गयी। दोनों को दो-दो गोली लगी थी जो आर-पार हो गयी थी। घटना के दूसरे दिन रांची से फॉरेंसिक और सीआईडी की टीम जांच के लिये पहुंची। टीम ने घटना स्थल से आठ खोखा और दो पिलेट बरामद किया था। बरामद पिलेट को फॉरेंसिक टीम जांच के लिये अपने साथ ले गयी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह पता चल सकेगा की कौन सी गोली का पिलेट है।
क्या- क्या हुआ जब्त
पुलिस ने सुधाकर सुमन झा के घर से 25 जिंदा कारतुस, घटनास्थल के पास से एक बुलेट, एक स्कूटी, एक तलवार और दो चाकू बरामद किया है।
किस परिस्थिति में दो अंगरक्षक को गोली लगने से हुई मौत बनी पहेली
मछली व्यवसायी सुधाकर सुमन झा के स्टॉफ के उपर लगभग दो माह पूर्व रंगदारी मांगने को लेकर गोली चलायी गयी थी। इस घटना में शामिल बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके बाद आशिष मिश्रा के द्वारा जान मारने की धमकी दिया जा रहा था। इसके बाद उसने एसपी से बॉडिगार्ड की मांग की थी। उसके उपरांत उसे अगंरक्षक मुहैया कराया गया था। अचानक 11 फरवरी की आधी रात को पप्पू सिंह से विवाद हो गया और गोली चलने लगी। उसी दौरान नगर थाना पुलिस भी पहुंची और आत्मरक्षा के लिये थाना प्रभारी और एक एसआई ने भी गोली चलायी। गोलीबारी में सुधाकर सुमन के दोनों अंगरक्षकों को गोली लग गयी और दोनों की मौत घटनास्थल पर ही हो गयी थी। मृतक जवानों को किस परिस्थिति में किसकी गोली लगने से मौत हुई यह पहेली बन गया है। घटनास्थल से बरामद हुए पिलेट की जांच के लिये एफएसएल टीम ले गयी है। एफएसएल की रिपोर्ट आने के बाद भी इससे कुछ पर्दा हट सकता है।


