
Deoghar: एक युवक…एक बुलेट मोटरसायकल… 8 दिन की गुमशुदगी और गड्ढे मे दफ़्न लाश…यह न तो रील लाइफ की रुपहली कहानी है और न ही किसी फिल्मी स्क्रिप्ट का हिस्सा बल्कि, यह रियल मिस्ट्री का वो सनसनीखेज खुलासा है जिसका गवाह बनने के बावजूद खाकी के नुमाइंदे भी हैरान हैं।

तारीख- 28 अगस्त दो हज़ार बाईस… दोपहर का वक्त और जसीडीह थान इलाके का लकरा गांव….जहां के एक ज़ोरए के समीप से हर गुजरने वाले शख्श को काफ़ी दुर्गंध आ रही थी….इसी बीच एक शख्श ने जसीडीह पुलिस को इसी जगह से काफ़ी बदबू आने की खबर दी…लिहाज़ा, पुलिस भी बिना वक्त गंवाए ठीक उस जगह तक पहुंच गई…जहां का पता बताया गया था…

पता बताने वाला भी कोई और नहीं बल्कि, उस युवक के घरवाले थे जो, पिछले आठ दिनों से लापता था…पुलिस में उसकी गुमशुदगी की रपट भी लिखाई थी लिहाज़ा… युवक की तलाश में जुटी पुलिस भी फौरन बताए जगह पर पहुंच गई और बजबजाती बदबू की पड़ताल शुरू कर दी…वर्दी वाले अभी इधर-उधर देख ही रहे थे कि, अचानक उनकी नज़र एक गड्ढे पर टिक गई…
और जब नज़दीक जाकर देखा तो वहाँ मौजूद तमाम लोगों का सांस लेना दूभर हो गया…और इस बीच मौके पर आस-पास के लोगों की भीड़ जमा हो गई…अभी लोग कुछ माजरा समझ पाते उससे उससे पहले पुलिस ने फौरन गड्ढे को खोदने का फैसला किया और फावड़े की मदद से गड्ढा खोदा जाने लगा..और जब हकीकत सामने आई तो मौके पर मौजूद लोगों के रौंगटे खड़े हो गए..
हर किसी का कलेजा कांप गया और अजीब सी खामोशी छा गई…क्योंकि, दुर्गंध कहीं और से नहीं बल्कि, गड्ढे में दफ़्न एक लाश से आ रही थी…लाश को बड़े ही तरीके से बांधकर और सफेद पॉलीथिन में लपेट कर दफ़्न किया गया था…शव पूरी तरह से क्षत-विक्षत हो चुका था और उसकी पहचान भी मुश्किल थी लेकिन, पिछले 8 रोज़ से लापता अपने बेटे की तलाश रहे घरवालों ने फौरन लाश के लिबास से उसकी पहचान कर ली और फिर घरवालों को उसकी लाश नसीब हुई।
दरहकीकत, मृतक देवीपुर के एक गांव भोजपुर का रहने वाला विष्णु मिर्धा था…25 साल का विष्णु, गुजरात मे काम करता था लेकिन, एक महीने पहले वह वापस अपने गांव आया था…मृतक के परिजनों की माने तो, बीते 20-21 अगस्त के रोज़ विष्णु अपने घरवालों से दोस्तों से मिलने की बात कह बुलेट मोटरसायकल से निकला था…जिसके बाद उसने फोन कर दूसरे दिन घर वापस लौटने की बात कही थी लेकिन, फिर उसका फोन अचानक बंद हो गया…
किसी अनहोनी की आशंका के बीच घरवालों ने फौरन थाने जाकर विष्णु के गुमशुदगी की रपट लिखाई और खुद भी उसकी तलाश शुरू कर दी। तलाश के दौरान जब विष्णु के घरवाले लकरा गांव स्थित जोरिया के समीप पहुंचे तो वहां से उन्हें नाक़ाबिले बर्दाश्त बदबू आने लगी जिसके बाद की पूरी कहानी की परत दर परत खुलते देर नहीं लगी।
बहरहाल, परिजनों की तहरीर के बिनाह पर खाकी ने विष्णु के उन दोस्तो की खातिरदारी जारी है जो आखिरी वक्त पर उसके साथ था। फिलहाल, कत्ल…साज़िश या हादसा की हकीकत से पर्दा उठना अभी बाकी है लेकिन, गड्ढे में दफन लाश की इस सनसनखेज दास्तान ने लोगों को सन्न ज़रूर कर दिया है।


